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Loksabha Election: इस बार इतना बढ़ा चुनावी बजट, जाने कहां-कहां होता है खर्च | Loksabha Election expenses

Posted on: 13 Mar 2019 12:38 by Surbhi Bhawsar
Loksabha Election: इस बार इतना बढ़ा चुनावी बजट, जाने कहां-कहां होता है खर्च | Loksabha Election expenses

सत्ता का फाइनल यानी लोकसभा चुनाव 2019 दुनिया के सबसे महंगे चुनावों में से एक माना जा रहा है। 11 अप्रैल से शुरू होकर 19 मई तक चलने वाले लोकसभा चुनाव के नतीजे 23 मई को आएंगे। नई दिल्ली स्थित सेंटर फॉर मीडिया स्टडीज (CMS) के अनुसार इस बार चुनाव प्रक्रिया में 500 अरब रुपये यानी 7 अरब डॉलर खर्च होंगे।

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प्रति वोटर 8 डॉलर बैठ रहा खर्च

CMS के आकलन पर गौर करें तो यह खर्च 2014 में संसदीय चुनावों के दौरान खर्च हुए 5 अरब डॉलर से 40 फीसदी ज्यादा है। यह एक ऐसे देश में है जहां 60 फीसदी आबादी 3 डॉलर प्रतिदिन पर जीवन-यापन करती है और चुनावी खर्च का आंकड़ा 8 डॉलर प्रति वोटर बैठता है। अमेरिकी राजनीति में पैसे का हिसाब-किताब रखने वाली OpenSecrets.org के मुताबिक 2016 के में अमेरिका के राष्ट्रपतीय और संसदीय चुनाव में 6.5 अरब डॉलर खर्च हुए थे।

सोशल मीडिया पर खर्च में बढ़ोतरी

सीएमएस के अध्यक्ष एन. भास्कर राव ने बताया कि इस बढे खर्च का ज्य्दादत हिस्सा सोशल मीडिया, यात्रा और विज्ञापन के मद में खर्च होगा। राव का कहना है कि इस बार लोकसभा चुनाव में सोशल मीडिया पर खर्च में जबरदस्त बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। 2014 लोकसभा चुनाव में सोशल मीडिया पर 2.5 अरब रुपये का खर्च आया था जो अब बढ़कर 50 अरब रूपये हो सकता है। अनुमान के मुताबिक इस बार हेलिकॉप्टरों, बसों और उम्मीदवारों व पार्टी वर्करों की यात्राओं के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले साधनों में काफी बढ़ोतरी होगी।

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आज हम आपको बताते है कि चुनाव में कैसे और कहां-कहां खर्च हो सकता है-

पैसा के अलावा ये भी हो सकता है गिफ्ट

543 सीटों के लिए ह्जोने वाले लोकसभा चुनाव में करीब 8 हजार उम्मीदवार मैदान्ब में उतर सकते है.इसके बीच जीत हासिल करना बड़ी चुनौती है. उधर, सीक्रेट बैलट से यह साफ है कि घूस देने के बाद भी इसकी गारंटी नहीं है कि वोट मिला ही हो। चार्टर्ड के मुताबिक़ऐसे में गिफ्ट मिलने से भारत के वोटरों को यह अहसास जरूर होगा कि उम्मीदवार काफी प्रभावी और अमीर है।

एक सर्वे के आंकड़े की माने तो देश के ज्यादातर नेताओं का कहना है कि उनके साथ के लोग कैश, शराब और दूसरे निजी सामानों के गिफ्ट से दबाव महसूस करते हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफॉर्निया के सहायक प्रफेसर जेनिफर बशेल के सर्वे के अनुसार कुछ इलाकों में तो ब्लेंडर्स, टीवी सेट्स और कभी कभार बकरियों को गिफ्ट के तौर पर बांटा जाता है। हालांकि कानूनी टूर पर कैंडिडेट्स को एक सीमा के अंदर खर्च करना होता है लेकिन जीत के लिए पार्टियां जबदस्त पैसा झौंक देती है।

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खाने पर खर्च

चुनावी मोड में नेता देश के एक छोर से दूसरे छोर में जाकर रैलियां करते है। इन रैलियों में भीड़ जुटाने के लिए कुछ नेता खाने के डिब्बे देते है, जिसमें बिरयानी और चिकन करी परोसी जाती है और ये काफी खर्चीली साबित होती है। इसके अलावा बड़े-बड़े टेंट, कुर्सियां, सुरक्षा व्यवस्था और गाड़ियों पर भी खर्च होता है।

डमी कैंडिडेट्स

राजनीतिक पार्टियाँ चुनाव में जीत पाने के लिए मजबूत उम्मीदवार के नाम के लोगों को चुनाव में खड़ा कर वोट काटने की रणनीति अपनाती हैं। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्यों में इस तरह की रणनीति बेहद काम आती है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि डमी कैंडिडेट्स खड़े करने में काफी पैसा खर्च होता है। एक रिपोर्ट की माने तो इसमें करोड़ो रूपये का खर्च हो जाता है।

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विज्ञापनों पर खर्च

चुनाव आयोग के मुताबिक़ 2014 लोकसभा चुनाव में दोनों प्रमुख पार्टियों ने 12 अरब रूपये खर्च किए थे। जेनिथ इंडिया के मुताबिक इस बार के चुनाव में विज्ञापनों पर 26 अरब रूपये से ज्यादा का खर्च आ सकते है। ऐसे में देखा जाए तो इस बार यह खर्च दोगुना हो रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक केवल फरवरी में फेसबुक पर राजनीतिक विज्ञापनों पर 4 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किए गए। इसके अलावा ‘नमो अगेन’ के स्लोगन की तरह टी-शर्ट्स भी आ गए हैं।

हाथी और नाव

चुनावी खर्च का अधिकांश हिस्सा राजनीतिक पार्टियों द्वारा किए जाने वाले प्रचार-प्रसार पर ही खर्च होता है लेकिन चुनाव के आयोजन के लिए चुनाव आयोग को भी भारी खर्चा करना पड़ता है। देश के बजट में इस वित्त वर्ष में चुनाव आयोग के लिए 2.62 अरब रुपये आवंटित किए गए हैं, जो कि अब तक की सबसे बड़ी राशि है। चुनाव आयोग को 15 हजार फीट ऊपर हिमालय की पहाड़ी और पश्चिम भारत के जंगलों के भीतर अकेले रह रहे एक संन्यासी के लिए भी मतदान केंद्र बनाना होता है। इसके अलावा दुर्गम इलाकों में EVM पहुंचाने के लिए हाथियों और पूर्वोत्तर में विशालकाय ब्रह्मपुत्र नदी के आर-पार मतदानकर्मियों के लिए नौकाओं पर होने वाले खर्च का भी वहां करना होता है।

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