Breaking News

आडवाणी – जोशी युग का इतना बुरा अंत….

Posted on: 21 Mar 2019 21:14 by Surbhi Bhawsar
आडवाणी – जोशी युग का इतना बुरा अंत….

परिवार हो या दफ्तर हो या समाज हो या संगठन हो उसकी जड़ को कभी इस तरह से नहीं काटा जाता कि पूरा पेड़ ही कट जाए। पूरा ढांचा ही गिर जाए। भाजपा ने लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी का टिकट काटकर आखिर देश और पार्टी के उन कार्यकर्ताओं को क्या बताने की कोशिश की जो बरसों से दरी बिछा रहे हैं। जो अभी भी गर्दन हिलने और पैरों से नहीं चलने के बावजूद पार्टी का काम करते हैं।

जनसंघ के जमाने से लेकर भाजपा और अब सत्तारूढ़ भाजपा में काम करने वाले कार्यकर्ताओं ने जब यह सुना कि लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी का टिकट कट गया तो पहली प्रतिक्रिया आई। परिवार के बुजुर्ग का ऐसा अपमान करना तो कानूनी जुर्म भी है। आखिर आडवाणी और जोशी से क्या गलती हो गई थी। यदि उनका टिकट काटना भी था तो उनको पहले बता देते ताकि वह पहले से ही सुषमा स्वराज की तरह ट्वीट पर घोषणा कर देते कि हम अब चुनाव नहीं लड़ना चाहते। दिखावे के लिए पार्टी अध्यक्ष को चिट्ठी लिख देते कि अब हम आराम करना चाहते हैं। अब हम उम्र दराज हो गए हैं। नए लोगों को मौका देना चाहिए। हम पार्टी की सेवा हमेशा करते रहेंगे। कुछ इस तरह का ट्वीट या घोषणा आडवाणी और जोशी की तरफ से पहले आ जाती तो आज पूरे देश में पार्टी का कार्यकर्ता यह नहीं कहता कि उनके टिकट काट दिए। बल्कि यह कहता कि उन दोनों ने चुनाव लड़ने से मना कर दिया था। इसलिए पार्टी ने हमको टिकट नहीं दिया।

प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेई ने जब गुजरात में हुए दंगों के दौरान पूरे देश में हाहाकार मच गया था तब कहा था कि नरेंद्र मोदी को राजधर्म का पालन करना चाहिए। वाजपेई ने साफ कह दिया था कि मोदी को इस्तीफा दे देना चाहिए। उनकी ढाल बने लालकृष्ण आडवाणी ने कभी जीवन में सोचा भी नहीं होगा कि एक दिन ऐसा आएगा कि वे जिस मोदी का राजनीतिक कैरियर बचाने की बात करेंगे वहीं उनका राजनीतिक कैरियर बर्बाद करने पर तुल जाएगा। मालवी भाषा में कहो तो बुढ़ापा खराब हो जाएगा।

आडवाणी प्रधानमंत्री नहीं बन पाए। मोदी को प्रधानमंत्री चुनाव के पहले ही घोषित कर दिया था। उसके बाद भी आडवाणी की जो बुरी गत पार्टी में हुई उससे भाजपा ही नहीं हर पार्टी के कार्यकर्ताओं को अब यह सोचने के लिए मजबूर कर दिया कि जब तक आपकी जरूरत है। तब तक ही आपको पूछा जाएगा। जब आप की जरूरत नहीं होगी तो आपको दूध में से मक्खी की तरह निकाल कर फेंक दिया जाएगा। यदि ऐसा कांग्रेस पार्टी में होता तो शायद पूरी भाजपा टूट पड़ती। लेकिन भाजपा ने और खासतौर से नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी ने वह साहस कर दिखाया जो कोई नहीं कर पाया।

इसके पहले भी अटल बिहारी वाजपेई और लालकृष्ण आडवाणी में कई बार विचारों के मतभेद रहे। हर बार दोनों एक दूसरे की बाद में तारीफ भी करते रहे। इसके अलावा भी बाकी नेताओं में विवाद होते रहे। लेकिन लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी जैसे तपोनिष्ठ नेताओं के कारण पार्टी झुग्गी झोपड़ी से मल्टी स्टोरी में तब्दील हो गई है। वह पार्टी अब उनका सम्मान नहीं कर सकती तो अपमान भी करने का अधिकार नहीं है। परिवार में यदि कोई बुजुर्ग हो जाता है कई बीमारियां हो जाती है और मौत नहीं होती तो क्या परिवार के सदस्य उनको जहर देकर मार देते हैं।

कुछ दिन पहले का एक न्यायालय का किस्सा याद आता है जिसमें मामला यह था कि एक सौ साल पुराने मकान को तोड़ने की बात नगर निगम ने कही थी। तो जज ने कहा क्या परिवार में कोई व्यक्ति सौ साल का हो गया है और वह जिंदा है। तो उसको मार दे। क्या वह बीमार होंगे तो उनका इलाज नहीं होगा। यदि सौ साल पुराने मकान में कई मध्यमवर्गीय लोगों की रोजी-रोटी जुड़ी हुई है। तो क्या उस मकान की मरम्मत हो सकती है। इस पर भी अफसरों को विचार करना चाहिए। भाजपा आडवाणी और जोशी को कोई न कोई सम्मानजनक पद दे सकती थी। लेकिन यदि पद नहीं दिया तो अपमान करने का अधिकार भी किसी को नहीं था। राष्ट्रपति – उपराष्ट्रपति जैसे पदों पर आडवाणी और जोशी बैठ सकते थे। लेकिन तब भी उनके साथ न्याय नहीं हुआ। ऐसे लोगों को उपकृत कर दिया जिनकी उम्मीद नहीं थी। या जो उन पर पर जाना नहीं चाहते थे। मोदी और अमित शाह की जोड़ी वाकई कमाल की है। कुछ दिन पहले का वह किस्सा भी याद आता है जब नरेंद्र मोदी ने सार्वजनिक सभा में कहा था कि मैं एक-एक से हिसाब चुकता करता हूं। मैं किसी को भूलता नहीं हूं। मैं पाई पाई का हिसाब लेता हूं। आज समझ में आ गया कि आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी ने नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री घोषित करने का विरोध 2014 में किया था। उसका खामियाजा उन्हें आज अपना टिकट खोकर कर भुगतना पड़ा। अब भाजपा में जो नेता उम्र दराज हो रहे हैं। उनको खुद को अपनी बेइज्जती कराने की बजाय आगे बढ़ कर कह देना चाहिए कि अब हम सक्रिय राजनीति नहीं करेंगे। क्योंकि पता नहीं कब उनका पार्टी सम्मान तो नहीं अपमान जरूर कर देगी। यह बात सही है कि आडवाणी और जोशी दोनों ही उम्र दराज नेता हो गए हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि उनकी घर वापसी सम्मानजनक तरीके से नहीं हो सकती थी। क्या यह सवाल हर कार्यकर्ता के मन में रहेगा। जब यह खबर आडवाणी और जोशी को पता चली होगी कि उनका टिकट पार्टी ने काट दिया। टीवी चैनल चिल्ला चिल्लाकर कह रहे हैं कि देखिए आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी कट गया। तब उन दोनों के दिल पर क्या बीत रही होगी। दोनों इस झटके को किस रूप में ले रहे होंगे। महसूस करना भी किसी तनाव से कम नहीं है। वैसे दूसरी बार नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बन गए तो इस तरह के कई चमत्कार सरकार और पार्टी में इस देश के लोग और पार्टी के कार्यकर्ता देखते रहेंगे।

 

@राजेश राठौर

Latest News

Copyrights © Ghamasan.com