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योगी की सीट को जीतने के लिए भाजपा का फिल्मी योग | Loksabha Election 2019 Ravi Kishan contest from Gorakhpur Loksabha Seat

Posted on: 16 May 2019 15:51 by Surbhi Bhawsar
योगी की सीट को जीतने के लिए भाजपा का फिल्मी योग | Loksabha Election 2019 Ravi Kishan contest from Gorakhpur Loksabha Seat

गोरखपुर की सीट भारतीय जनता पार्टी और खासतौर पर योगी आदित्यनाथ के लिए गोरखपुर की लोकसभा सीट प्रतिष्ठाका प्रसंग बन गई है। सीट जीतने की उतावली इतनी कि कांग्रेस छोड़कर आए रवि किशन को टिकट दिया गया। उनके नाम का चयन भी बमुश्किल हो पाया। वे बीते लोकसभा उपचुनाव से ही टिकट की कतार में थे। इस बार भी अमरेंद्र निषाद, धर्मेंद्र सिंह और उपेंद्र शुक्ल जैसे खांटी नेता अलग-अलग राजनीतिक दिग्गजों की तरफ से कतार में थे, लेकिन चली किसी की नहीं।

इसका असर भी भाजपा के चुनाव अभियान पर पड़कर ही रहेगा। वैसे अभी तक किसी ने खुलकर बगावत जैसी कोई बात नहीं देखी-सुनी गई है। हालांकि सुभाष निषाद के हाथों उपचुनाव हारने के बाद भी उपेंद्र दत्त शुक्ल का दावा इस सीट पर कमजोर नहीं हुआ था। फिर भी पार्टी रवि किशन के ग्लैमर का फायदा उठाने का लोभ संवरण नहीं कर पाई।

रवि किशन की ख्याति भोजपुरी से लेकर हिंदी फिल्मों तक औऱ अनेक टीवी धारावाहिकों में अभिनय के लिए भी है। हालांकि जौनपुर के शुक्ल परिवार से संबंधित रवि किशन ने 2014 का लोकसभा चुनाव कांग्रेस के टिकट पर जौनपुर से ही लड़ा था और हारे भी थे। वे दो साल पहले ही भाजपा में आए हैं। गोरखपुर में अपनी स्थिति दर्ज कराने के मकसद से रवि किशन ने बीते साल गोरखपुर महोत्सव में एक मेगा शो भी किया था। इसके अलावा भी वे गोरखपुर में चर्चाओं में रहे हैं। करीब तेरह साल पहले बिग बॉस में हिस्सा लेने से लेकर उनकी आने वाली फिल्म ‘बाटला हाउस’ तक उन्हें चर्चित करने के लिए पर्याप्त है।

वैसे गोरखपुर सीट की पहचान भी गुरु गोरक्षनाथ पीठ से है। इसी सीट से मौजूदा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गुरु और राम जन्मभूमि आंदोलन के दिग्गज महंत अवैद्यनाथ सांसद रहे और उसके बाद स्वयं योगी आदित्यनाथ। बीते दो दशक से उनके इस सीट पर वर्चस्व का अंदाजा महज इसी नारे से लगाया जा सकता है कि ‘गोरखपुर में रहना है तो योगी-योगी कहना है’।

हालांकि योगी के यह सीट छोड़ने और उसके बाद हुआ उपचुनाव हारने के बाद इस नारे को लगाने वालों का जोश नदारद है। हालांकि रवि किशन की चुनावी रैलियों में योगी समर्थकों ने यह नारा बुलंद कर उनका नाम कायम रखने और प्रभाव जताने की जी तोड़ कोशिशें की है। इसके चलते ही रवि किशन के लिए नारा गढ़ा ‘अश्वमेघ का घोड़ा है, योगीजी ने छोड़ा है’। इसी कारण राज्य की राजनीति के अनेक दिग्गजों ने गोरखपुर से दूरी बना ली है।

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