खंडवा में हारे-नकारे पूर्व अध्यक्ष एक-दूसरे के सामने | Former Chairman faces each other in khandwa

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nandkumar sing chauhan with arun yadav-min

मध्यप्रदेश की प्रमुख पार्टियों कांग्रेस और भाजपा से नकारे अध्यक्ष खंडवा में एक-दूजे के सामने निमाड़ अंचल की इकलौती सामान्य सीट खंडवा(khandwa), जिसकी पहचान फिल्मी दुनिया की अजीम हस्ती किशोर कुमार के नाम से भी है सत्रहवीं लोकसभा के चुनाव में अपनी-अपनी पार्टियों से नकारे गए, एक-दूसरे को एक-एक बार इसी सीट से लोकसभा चुनाव हरा चुके दो नेताओं के बीच चुनावी मुकाबलले का साक्षी बनेगा। ये दो नेता है भारतीय जनता पार्टी के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष नंदकुमारसिंह चौहान और कांग्रेस के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अरुण यादव

अरुण यादव की संसदीय पारी 2007 में खरगोन लोकसभा के उपचुनाव से शुरू हुई थी। तब भाजपा के दिग्गज कृष्णमुरारी मोघे ऑफिस ऑफ प्राफिट के आरोप में बर्खास्त कर दिए गए थे। उपचुनाव में भी पार्टी ने उन्हें दोबारा मौका दिया, लेकिन वे अरुण यादव से हार गए। 2008 के परिसीमन में खरगोन सीट अनुसूचित जनजाति यानी आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित कर दी गई। इसके चलते 2009 के चुनाव में अरुण यादव खंडवा सीट पर लड़ने पहुंच गए। इतना ही नहीं उन्होंने दीर्घ अनुभवी नंदकुमारसिंह चौहान को हरा भी दिया।

वैसे चौहान 1996 से खंडवा लोकसभा सीट से जीतते आ रहे थे। तमाम विरोधाभासों के बाद भी उन्होंने 1998, 1999 और 2004 के लोकसभा चुनाव जीते। इतना ही नहीं 2014 की मोदी लहर ने उनका साथ दिया और वे अरुण यादव को ही हराकर सोलहवीं लोकसभा के सदस्य बन गए। उसके बाद पार्टी ने दोनों ही नेताओं को प्रदेशाध्यक्ष पद से नवाजा और खारिज भी कर दिया। बतौर अध्यक्ष न तो चौहान कोई कमाल बता पाए और न ही यादव की कोई उपलब्धि रही। 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने अरुण यादव को तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के सामने बुधनी से चुनाव मैदान में उतारा, लेकिन उन्हें कामयाबी नहीं मिली।

सत्रहवीं लोकसभा के चुनाव में हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे प्रभावित किए बगैरर नहीं रहेंगे। इस लिहाज से भाजपा की स्थिति कमजोर आंकी जा रही है। वैसे भी पार्टी की एक तेजतर्रार महिला नेता से चौहान की अनबन जगजाहिर है। वहीं कांग्रेस को भी बुरहानपुर से निर्दलीय चुनाव लड़कर जीते सुरेंद्रसिंह उर्फ शेराभाई से खतरा हो सकता है। वे प्रदेश सरकार का समर्थन तो कर रहे हैं, लेकिन अपनी पत्नी को यहीं से लोकसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं। फिर भी भाजपा को मोदी लहर का आसरा है तो कांग्रेस को राहुल गांधी(Rahulgandhi) के चेहरे से कोई चमत्कार होने की उम्मीद।

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