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अब तक के चुनावी खर्च पर एक नजर, सबसे सस्ता रहा 1957 का चुनाव | Have A look at the Election Expenditure

Posted on: 14 Apr 2019 18:53 by Surbhi Bhawsar
अब तक के चुनावी खर्च पर एक नजर, सबसे सस्ता रहा 1957 का चुनाव | Have A look at the Election Expenditure

भारत का चुनाव दुनिया का सबसे खर्चीला चुनाव माना जाता है। अपने प्रचार-प्रसार में राजनीतिक पार्टियां पानी की तरह पैसा बहाती है। चुनावी खर्चों पर लगाम लगाने के लिए चुनाव आयोग ने खर्च की सीमा तय कर दी है। साथ ही काले धन पर रोक लगाने के लिए चुनावी बॉन्ड और चेक के जरिए राशि के लेन-देन की व्यवस्था बनाई लेकिन फिर भी चुनावी खर्च बेहिसाब बढ़ता जा रहा है। चुनाव आयोग ने इसको लेकर कई बार चिंता जताई है।

देश में सभी तक 16 लोकसभा चुनाव हुए है। इन चुनावों में सबसे ज्यादा खर्चीला चुनाव साल 2014 का था। इस चुनाव में 3870 करोड़ रुपए खर्च हुए थे। वही सबसे सस्ता चुनाव साल 1957 का था लेकिन चुनावी खर्च साल दर साल बढ़ता ही गया। इस बार भी अनुमान लगाया जा रहा है कि यह चुनाव साल 2014 के चुनावों के आंकड़ों को भी पार कर देगा।

1957 का चुनाव

अब तक देश में हुए 16 लोकसभा चुनावों में से सबसे सस्ता दूसरा चुनाव साल 1957 का रहा। 1957 के आम चुनाव में 5.9 करोड़ रुपए खर्च हुए थे जबकि 1952 यानी स्वतंत्रता के बाद पहले लोकसभा चुनाव में 10.45 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। इसके बाद आम चुनाव का खर्च बढ़ता गया।

सभी चुनावों के खर्च पर एक नजर

अब तक हुए चुनावों के खर्च पर नजर डाले तो भारत के पहले चुनाव यानी 1952 के आम चुनाव में 10.45 करोड़, 1957 में 5.9 करोड़, 1962 में 7.32 करोड़, 1967 में 10.8 करोड़, 1971 में 11.62 करोड़, 1977 में 23.04 करोड़, 1980 में 54.77 करोड़, 1954 में 81.51 करोड़, 1989 में 154.22 करोड़, 1991 में 359.1 करोड़, 1996 में 597.34 करोड़, 1998 में 666.22 करोड़, 1999 में 947 करोड़, 2004 में 1016.09 करोड़, 2009 में 1114.38 करोड़ और 2014 में 3870.35 करोड़ रूपये खर्च हुआ है।

2019 में इतना हो सकता है खर्च

2019 लोकसभा चुनाव को लेकर चुनाव विश्लेषकों का मानना है कि सोशल मीडिया पर बढ़ते प्रचार को देखते हुए इस बार उम्मीदवार ज्यादा खर्च करेंगे। उम्मीदवार 50 लाख रुपए से 70 लाख रुपए खर्च कर सकते हैं। अरुणाचल प्रदेश, गोवा और सिक्किम को छोड़कर अन्य राज्यों के उम्मीदवार अपने चुनाव प्रचार के दौरान 70 लाख रुपए तक खर्च कर सकते हैं। अरुणाचल प्रदेश, गोवा और सिक्किम के लिए 54 लाख रुपए और दिल्ली के लिए 70 लाख एवं केंद्रशासित प्रदेशों के लिए 54 लाख रुपए निर्धारित की गई है। जबकि विधानसभा चुनावों में प्रत्याशी 20 लाख से लेकर 28 लाख रुपए खर्च कर सकते हैं।

चुनावी खर्च का मांगा ब्यौरा

गौरतलब है कि पार्टी और उम्मीदवारों के चुनावी खर्च पर नकेल कसने के लिए चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों से चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के 90 दिनों के अंदर चुनावी खर्च का पूरा ब्योरा सौंपने के लिए कहा है। वही उम्मीदवारों को अपने खर्च का ब्योरा चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के 30 दिनों के अंदर ही देना होगा।

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