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आठ में से छह टिकट काटकर भी भाजपा को चैन नहीं | Lok Sabha Election 2019 BJP vs TMC in West Bengal

Posted on: 18 May 2019 11:26 by Surbhi Bhawsar
आठ में से छह टिकट काटकर भी भाजपा को चैन नहीं | Lok Sabha Election 2019 BJP vs TMC in West Bengal

पश्चिम बंगाल में इस बार चुनाव में जितनी उठापटक और हिंसा हुई उसने बिहार व उत्तर प्रदेश की यादें ताजा कर दी। एक-एक सीट के लिए कड़ा संघर्ष हुआ औऱ राज्य में सत्तारुढ़ सर्वभारत तृणमूल कांग्रेस के साथ ही यहां राज करने का ख्वाल संजो रही भारतीय जनता पार्टी ने कोई कसर नहीं छोड़ी। टीएमसी की तरफ से दीदी यानी ममता बनर्जी लगातार सक्रिय बनी रहीं तो भाजपा की ओर से अनेक सितारा प्रचारकों के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने मोर्चा संभाला।

साथ में राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय और अनेक कैडर बेस नेता वहां लगा दिए गए। इस दौड़धूप में कभी राज्य में सत्ता में रही वामपंथी पार्टियां और कांग्रेस तो तीसरे-चौथे नंबर की लड़ाई में ही जुटी रही, जैसे पिछले चुनाव के पहले तक उत्तर प्रदेश में भाजपा व कांग्रेस जुटी रहती थी। राज्य की कतिपय प्रतिष्ठा मूलक सीटों में से एक है उत्तर कोलकाता की सीट। यह सीट फिलवक्त टीएमसी दिग्गज सुदीप बंधोपाध्याय के पास है। वे लंबे समय से इस सीट को जीतते आ रहे हैं। इसी कारण इसे टीएमसी का सबसे मजबूत गढ़ कहा जाता है। यह सीट २००८ के परिसीमन में कोलकाता उत्तर-पश्चिम एवं कोलकाता उत्तर-पूर्व लोकसभा सीटों को मिलाकर बनाई गई है।

इससे पहले भी सुदीप उत्तर-पश्चिम सीट से 1998 व 99 के आमचुनाव में सांसद चुने गए थे। नए स्वरूप में सीट बनने के बाद पंद्रहवीं लोकसभा के चुनाव में उन्होंने मोहम्मद सलीम को एक लाख से भी ज्यादा अंतर से पटखनी दी थी। वहीं 2014 की मोदी लहर में भी उन्‍होंने भाजपा के राहुल सिन्हा को लगभघ एक लाख मतों के अंतर से ही हराया था। इस सीट पर प्रतिद्वंद्वी बदलते रहे लेकिन सुदीप दादा का दबदबा कायम ही रहा।

कभी यहां उनका मुकाबला भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) से हुआ करता था तो अब नंबर दो पर भाजपा आ गई है। इस बार भी राजनीतिक लिहाज से टीएमसी के लिए बड़ी राहत की बात है विधानसभा की जमावट। यहां की सातों विधानसभा सीटें चौरंगी, इंटाली, बेलियाघाटा, जोड़ासांको, श्यामपुकुर, मानिकतल्ला और काशीपुर बेलगछिया टीएमसी के ही पास हैं। भाजपा की अति सक्रियता के कारण मुकाबला दिलचस्प बन पड़ा है। टीएमसी सांसद जहां रोजवैली चिटफंड घोटाले और नारदा स्टिंग ऑपरेशन में उलझे है तो एंटी इन्कंबैंसी फेक्टर बी उनके खिलाफ जाता है। इसके बाद भी गांव-गांव, घर-घर तक टीएमसी का नेटवर्क उसका प्लस पाइंट माना जा रहा है। अब भाजपा के राहुल सिन्हा इस तिलिस्म को कैसे भेद पाते हैं, यह देखने वाली बात होगी।

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