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लोहड़ी पर्व आज : जलते अलाव के चारों ओर घुलेगी मिठास

Posted on: 13 Jan 2019 09:07 by Pawan Yadav
लोहड़ी पर्व आज : जलते अलाव के चारों ओर घुलेगी मिठास

मकर संक्रांति के एक दिन पहले पंजाबियों और सिखों द्वारा लोहड़ी पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। लोहड़ी पर जलते हुए अलाव और उसके चारों ओर भांगड़ा, गिद्दा करते सिख और मूंगफली और रेवड़ी मन में मिठास घोल देती है। पंजाब में लोहड़ी को नए साल की शुरुआत भी मानते हैं। लोहड़ी पर्व को लेकर कई कथा और मान्यताएं हैं।

सिखों में लोहड़ी ब्याहने की एक परंपरा भी है। इसकी तैयारी करने के लिए लोकगीत गाकर लोग लकड़ी और उपले इकट्ठे करते हैं, जिसे ये एक चैराहे या पिंड के बीचों-बीच इकट्ठा करते हैं, जिसे रात में जलाया जाता है। इस मौके पर विवाहिता पुत्रियों को मां के घर से सिंधारा (वस्त्र, मिठाई, रेवड़ी और फल भेजे जाते हैं, जिसे लोहड़ी ब्याहना कहते हैं।

लोहड़ी रात के समय जलाई जाती है, तब सिख समुदाय के लोग अग्नि की परिक्रमा करते हैं और तिल, रेवड़ी और मक्के की आहुति देते हैं, जिसे फुल्ली कहते हैं। वहीं लोहड़ी में फुल्ली भेंट करने के बाद इसका प्रसाद भी बांटा जाता है। इसके बाद सभी एक-दूसरे को लोहड़ी की बधाई देते हैं। मान्यता अनुसार घर लौटते समय लोहड़ी में से दो चार दहकते कोयले, प्रसाद के रूप में, घर पर लाने की प्रथा भी है।

लोहड़ी पर्व का महत्व

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रबी सीजन की मुख्य फसल गेहूं काटने और इकट्ठा करके घर लाने से पहले, किसान इस पर्व का आनंद मनाते हैं। इस दौरान किसान सूर्य देवता को धन्यवाद देते हैं और आग में फुल्ले डालते हुए कहते हैं ‘आधार आए दिलाथेर जाए‘ जिसका मतलब होता है कि घर में सम्मान आए और गरीबी भाग जाए। सुबह बच्चे घर-घर जाकर लोहड़ी मांगते हैं. जिसमें लोग उन्हें पैसा और खाने-पीने की चीजें देते हैं।

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