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Live Update – सिर्फ एक धर्म, एक भाषा भारत की पहचान नहीं-संघ मुख्यालय में बोले प्रणब मुखर्जी

Posted on: 07 Jun 2018 15:10 by Lokandra sharma
Live Update – सिर्फ एक धर्म, एक भाषा भारत की पहचान नहीं-संघ मुख्यालय में बोले प्रणब मुखर्जी

नागपुर। आरएसएस के दीक्षांत समारोह में पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा कि मैं यहां राष्ट्र, राष्ट्रवाद और देशभक्ति पर बोलने आया हूं। तीनों विषय पर एक साथ बात करना संभव है। राष्ट्रवाद किसी धर्म जाति और भाषा से बंधा हुआ नहीं है। अलग ग्रंथ, अलग धर्म, अलग भाषा भारत की पहचान रही है। नेहरू के हवाले से उन्होंने कहा कि हिंदू, मुसलमान, सिख, इसाई मिलकर ही देश बनाते हैं।
उन्होंने कहा कि १९५० में जो संविधान मिला, वह पूरे देश को एकता के सूत्र में पिरो रहा है। हमारे संविधान से राष्ट्रवाद का प्रवाह होता है। विविधता में ही भारत बसता है। अपने ५० साल के राजनीतिक जीवन में मैंने यही सिखा। सिर्फ एक धर्म, एक भाषा भारत की पहचान नहीं है।
पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि डिस्कवरी ऑफ इंडिया में नेहरू ने राष्ट्रवाद की परिभाषा बताई। उन्होंने कहा कि भारत में सात धर्म, २२ भाषाएं और १६०० बोलियां बोली जाती है, इसके बावजूद १३० करोड़ की पहचान भारतीय है। उन्होंने कहा कि सहिष्णुता ही हमारी पहचान है।
बातचीत से समाधन आसान
प्रणब मुखर्जी ने संघ मुख्यालय में कहा कि आज गुस्सा बढ़ रहा है, हर दिन हिंसा की खबर आती है। बातचीत सी किसी भी समस्या को सुलझाया जा सकता है। भेदभाव और नफरत से भारत की एकता को खतरा हो सकता है। विचारों के आदान-प्रदान से हर समस्या का समाधान संभव है।

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