स्वतंत्रता दिवस पर कुमार विश्वास की ये कविताएं सुन आपकी आंखे हो जाएंगी नम

देश और जज्बे को हर कोई सलाम करता हैं गुरुवार को देश की आजादी का 73वां जश्न देश भर में मनाया जाएगा लोग अलग अलग तरीके से अपनी देशभक्ति बयां करेंगे इस खास मौके पर राष्ट्रीय कवि कुमार विश्वास की एक कविता यूट्यूब पर काफी छाई हुई है।

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देश और जज्बे को हर कोई सलाम करता हैं। गुरुवार को देश की आजादी का 73वां जश्न देश भर में मनाया जाएगा लोग अलग अलग तरीके से अपनी देशभक्ति बयां करेंगे। इस दिन हर जगह देशभक्ति के तराने गूंजते हुए नजर आएंगे और स्‍वतंत्रता संग्राम सेनानियों को याद किया जाता है। इस खास अवसर पर सरकारी विभागों, प्राइवेट संस्‍थानों, स्‍कूल-कॉलेजों में कार्यक्रम आयोजित होते हैं और तिरंगा फहराया जाता है और इस खास मौके पर राष्ट्रीय कवि कुमार विश्वास की एक कविता यूट्यूब पर काफी छाई हुई है। डॉ. कुमार विश्‍वास की कविता ‘है नमन उनको’ आपकी आंखें नम कर देगी।

कुमार विश्वास की यह कविता शहीदों पर बनी हुई हैं और कविता संवेदनाओं से भरी है उन्होंने कई मंचों पर इस कविता को सुनाया भी है। जब भी वह इस कविता को सुनाते हैं तो वहां मौजूद सभी लोगों की आंखें नम हो जाती हैं। यूट्यूब पर कुमार विश्‍वास ने इस कविता को बीते साल अगस्‍त में अपलोड किया था जिसे अब तक 45 लाख से ज्‍यादा बार सुना जा चुका है।

है नमन उनको कि जो देह को अमरत्व देकर
इस जगत में शौर्य की जीवित कहानी हो गये हैं
है नमन उनको कि जिनके सामने बौना हिमालय
जो धरा पर गिर पड़े पर आसमानी हो गये हैं

पिता जिनके रक्त ने उज्जवल किया कुलवंश माथा
मां वही जो दूध से इस देश की रज तौल आई
बहन जिसने सावनों में हर लिया पतझर स्वयं ही
हाथ ना उलझें कलाई से जो राखी खोल लाई
बेटियां जो लोरियों में भी प्रभाती सुन रहीं थीं
पिता तुम पर गर्व है चुपचाप जाकर बोल आये
है नमन उस देहरी को जहां तुम खेले कन्हैया
घर तुम्हारे परम तप की राजधानी हो गये हैं
है नमन उनको कि जिनके सामने बौना हिमालय ….

हमने लौटाये सिकन्दर सर झुकाए मात खाए
हमसे भिड़ते हैं वो जिनका मन धरा से भर गया है
नर्क में तुम पूछना अपने बुजुर्गों से कभी भी
उनके माथे पर हमारी ठोकरों का ही बयां है
सिंह के दाँतों से गिनती सीखने वालों के आगे
शीश देने की कला में क्या अजब है क्या नया है
जूझना यमराज से आदत पुरानी है हमारी
उत्तरों की खोज में फिर एक नचिकेता गया है

है नमन उनको कि जिनकी अग्नि से हारा प्रभंजन
काल कौतुक जिनके आगे पानी पानी हो गये हैं
है नमन उनको कि जिनके सामने बौना हिमालय
जो धरा पर गिर पड़े पर आसमानी हो गये हैं
लिख चुकी है विधि तुम्हारी वीरता के पुण्य लेखे
विजय के उदघोष, गीता के कथन तुमको नमन है
राखियों की प्रतीक्षा, सिन्दूरदानों की व्यथाओं

देशहित प्रतिबद्ध यौवन के सपन तुमको नमन है
बहन के विश्वास भाई के सखा कुल के सहारे
पिता के व्रत के फलित माँ के नयन तुमको नमन है
है नमन उनको कि जिनको काल पाकर हुआ पावन
शिखर जिनके चरण छूकर और मानी हो गये हैं
कंचनी तन, चन्दनी मन, आह, आँसू, प्यार, सपने
राष्ट्र के हित कर चले सब कुछ हवन तुमको नमन है

है नमन उनको कि जिनके सामने बौना हिमालय
जो धरा पर गिर पड़े पर आसमानी हो गये

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