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जवाहरलाल नेहरु कृषि विश्वविद्यालय की जमीन छीने जाने को लेकर नीरज राठौर का पीएम को पत्र

Posted on: 03 Jul 2019 16:01 by Surbhi Bhawsar
जवाहरलाल नेहरु कृषि विश्वविद्यालय की जमीन छीने जाने को लेकर नीरज राठौर का पीएम को पत्र

नई दिल्ली: जवाहरलाल नेहरु कृषि विश्वविद्यालय के भूतपूर्व स्टूडेंट नीरज राठौर द्वारा विश्वविद्यालय की 200 एकड़ सेटेलाईट सिटी के नाम पर छीने जाने के विरोध में भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर अपना विरोध प्रकट किया है। राठौर ने कहा कि इंदौर कृषि कॉलेज की जमीन जिला कोर्ट बनाने के नाम पर छीनने के प्रयास पर तात्कालीन शिवराज सरकार को पीछे हटना पडा था। राज्य सरकार प्रदेश के कृषि कॉलेजों एवं युनिवेर्सिटी की अनुसन्धान की जमीनों के पीछे क्यों पड़ी हुई है ?

जवाहरलाल नेहरु कृषि विश्वविद्यालय की जमीन छिनने का विरोध कृषि आन्दोलन के प्रमुख लीडर राधे जाट ने भी किया है। उन्होंने कहा की कृषि शिक्षा के निजीकरण के विरोध में हमारे 500 से ज्यादा स्टूडेंट 15 कृषि कॉलेजों में हड़ताल एवं धरना प्रदर्शन कर रहे है। उन्होंने कहा कि सरकार हमारी युनिवेर्सिटी की सुई की नोक के बराबर भी जमीन नहीं छीन सकती है। यदि ऐसा कोई प्रयास हुआ तो हमारे आन्दोलनकारी छात्र आर या पार की लड़ाई लड़ेंगे।

शिकायत का विवरण – माननीय श्री नरेन्द्र मोदी जी,
प्रधानमंत्री
भारत सरकार

विषय- जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय परिसर जबलपुर की 200 एकड़ जमीन हड़पने की साजिश रचे जाने बावत।

महोदय,

जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय परिसर में सैटेलाइट सिटी बनाने के लिए प्रदेश सरकार ने 200 एकड़ की जमीन मांगी है। इसके लिए प्रशासनिक अधिकारियों ने विवि फार्म का निरीक्षण कर जमीन भी देख ली है। इसके पहले भी इंदौर कृषि कालेज की सेकड़ो एकड़ जमीन छिनने एवं इस पर जिला कोर्ट लाने की योजना पर तब की शिवराज सिंह चौहान सरकार मुह की खा चुकी है, उन्हें भारी विरोध के चलते पीछे हटना पढ़ गया था ।

दरअसल विवि नियमानुसार विवि की जमीन हस्तांतरित करने का अधिकार विवि के कुलपति को नहीं है। यह निर्णय सिर्फ विवि का प्रबंध मंडल (बोर्ड) ही ले सकता है, इसलिए अब विवि प्रशासन यह प्रस्ताव बोर्ड में रखेगा। अब बोर्ड के सदस्य ही यह तय करेंगे कि सैटेलाइट के लिए जमीन शासन को दी जाए या नहीं।

लेकिन यहाँ में ये कहना चाहूँगा कि क्या विश्वविद्यालय की जमीन बोर्ड मेम्बरों के बाप की जागीर है क्या? प्रशासन को यहाँ के स्टूडेंट्स, स्टाफ, स्थानीय किसानो से भी पूछना चाहिए जो की इस जमीन के देने के विरोध में है बोर्ड में रखने विवि ने तैयार किया प्रस्ताव भी तैयार कर दिया है :-
प्रदेश सरकार की मंशा पर विवि प्रशासन ने काम शुरू कर दिया है। विवि द्वारा सैटेलाइट सिटी के लिए जमीन हस्तांतरित करने का प्रस्ताव तैयार करने जा रहा है। पहले इसे विवि के प्रशासनिक बैठक में रखा जाएगा, यहां से स्वीकृति मिलने के बाद इसे बोर्ड बैठक में ले जाया जाएगा। वर्तमान में बोर्ड में 22 में से 16 सदस्य हैं, जिसमें शिक्षाविद् से लेकर एग्रीकल्चर और फाइसेंस सेकेट्री से लेकर किसान, राज्य भवन व वल्लवभवन के नॉमनी शामिल हैं। हालांकि इस वक्त विधायक कोटे की 3 सीटें अभी खाली हैं। इस जमीन के कुछ तथ्य :-

यदि जमीन गई तो सीड प्रोडक्शन कम हो सकता है

जनेकृविवि हर साल 20 हजार क्विंटल ब्रीडरशिप (बीज उत्पादन) तैयार कर देश के कृषि विवि में नंबर वन है। विवि फार्म में धान, गेहूं, चना और सोयाबीन का सीड उत्पादन करता है। वहीं जनेकृविवि में 2300 एकड़ जमीन में से वर्तमान में मुश्किल से 943 एकड़ जमीन शेष बची है। यदि 200 एकड़ भूमि पर सैटेलाइट सिटी बनेगी तो महज 643 एकड़ जमीन रह जाएगी, जिससे विवि के शिक्षण एवं अनुसंधान को नुकसान पहुंचेगा।

जमीन लेने का विरोध है

आम नागरिक मित्र फाउण्डेशन ने इसका विरोध किया है। उनका कहा है कि इससे न विवि में चल रहे सीड प्रोडेक्शन का ग्राफ गिरेगा बल्कि इससे जुड़े दूसरे कृषि अनुसंधान के काम भी प्रभावित होंगे। फाउण्डेशन के डॉ.पीजी नाजपांडे ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा यहां पर सैटेलाइट सिटी के लिए कृषि विवि की भूमि लेने का निर्णय गलत है। पहले ही जनेकृविवि के अधिकांश हिस्सा वेटरनरी विवि अधारताल और खरपतवार अनुसंधान निर्देशालय महाराजपुर के पास चला गया है। विवि के पास सीड प्रोडेक्शन के लिए जमीन ही नहीं बची है। कम जमीन होने के बावजूद भी जबरन 200 एकड़ जमीन छीनी जा रही है।

यदि राज्य सरकार द्वारा जबरन जमीन छीनी गई तो हम सभी वर्त्तमान एवं भूतपूर्व कृषि स्नातक स्टूडेंट्स इसके खिलाफ अनशन, हड़ताल एवं धरना प्रदर्शन करेंगे।

निवेदक- नीरज राठौर, एलुमनाई स्टूडेंट, जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय

अध्यक्ष:- गौतम बुध्धा एजुकेश एवं सोशल वेलफेयर सोसाइटी इंदौर एवं सदस्य अनुरण संस्था

समस्त कृषि स्नातक स्टूडेंट्स कृषि कालेज इंदौर RVSKVV एवं JNKVV एवं समस्त भूतपूर्व स्टूडेंट्स, कृषि कालेज इंदौर मध्य प्रदेश।

समर्थक संस्थाए- अंकुरण संस्था कृषि कालेज इंदौर, गौतम बुध्धा एजुकेश एवं सोशल वेलफेयर सोसाइटी इंदौर, आम किसान यूनियन, भारतीय किसान यूनियन, किसान जाग्रति संगठन, किसान पंचायत बुंदेलखंड, रोको- ठोको रीवा, अफीम उत्पादक किसान, दुग्ध किसान संघ, किसान सेना एवं युवा किसान सेना।

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