तीन तलाक बिल पर बोले कानून मंत्री- बेटियों को फुटपाथ पर नहीं छोड़ा जा सकता

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नई दिल्ली। राज्यसभा में सरकार की ओर तीन तलाक बिल पेश किया जाना है। इस बिल का विपक्ष द्वारा लगातार विरोध किया जा रहा है। राज्यसभा में कार्यवाही के दौरान काननू मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी कार्रवाई नहीं हो पा रही थी और छोटी-छोटी बातों पर तीन तलाक दिया जा रहा था। हम इसी वजह से फिर से कानून लेकर आए हैं। उन्होंने कहा कि लोगों को शिकायतों के बाद बिल में कुछ बदलाव भी किए गए हैं।

अब इसमें बेल और समझौता का प्रावधान भी रखा गया है। इस सवाल को वोट बैंक के तराजू पर न तौला जाए, यह सवाल नारी न्याय, नारी गरिमा और नारी उत्थान का सवाल है। कानून मंत्री ने कहा कि एक तरफ बेटियां फाइटर प्लेन चला रही हैं और दूसरी तरफ तीन तलाक की पीड़ित बेटियों को फुटपाथ पर नहीं छोड़ा जा सकता। उन्होंने सदन से बिल को पास करने की अपील की।

महिला सम्मानित जीवन जीने की हकरदार

कांग्रेस सांसद याज्ञिक ने कहा कि न्याय और समानता सबसे पहले गरिमा की बात करता है और कानून से पहले महिलाओं को समाज में बराबरी मिलनी चाहिए। महिला सुरक्षित, बेखौफ और सम्मानित जीवन जीने की पूरी हकदार हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय महिलाओं के बीच विभेद मत करिए, सभी को पति की जरूरत है और उसे बेल का पूरा हक है। कांग्रेस सांसद ने कहा कि क्या महिलाएं अपने अधिकार जानती हैं और उन्हें कानूनी सहायता पाने के बारे में जानकारी है।

याज्ञिक ने कहा कि बेल और मुआवजे के सवाल को आपने मजिस्ट्रेट पर निर्भर रखा है, लेकिन पारिवारिक मामले में कोर्ट कैसे न्याय कर पाएगा. महिला को बच्चों की कस्टडी भी चाहिए होगी, यह फैमिली कोर्ट में नहीं बल्कि मजिस्ट्रेट में यह सब तय होगा। उन्होंने कहा कि बच्चों को समझ नहीं आता क्यों उनके माता-पिता कोर्ट में लड़ रहे हैं, क्या सरकार मामला निपटने तक उन बच्चों का ध्याय रखने के लिए तैयार है। क्या बच्चों को मानसिक संतुष्टि और सलाह सरकार दे पाएगी। आप 20 देशों का उदाहरण दे रहे थे, लेकिन महिलाओं को कोर्ट में मत धकेलिए।

जेडीयू सांसद वशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा कि हमारी पार्टी इस बिल के साथ नहीं है। उन्होंने कहा कि हर पार्टी की एक विचारधारा है और उसके पालन के लिए वह स्वतंत्र है। वशिष्ठ नारायण ने कहा कि विचार की यात्रा चलती रहती है और उसकी धाराएं बंटती रहती हैं लेकिन खत्म नहीं होती।

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