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हंसाते भी थे रुलाते भी

Posted on: 02 Jan 2019 16:38 by Surbhi Bhawsar
हंसाते भी थे रुलाते भी

मुकेश तिवारी

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उन्हें हंसाना भी आता था और रुलाना भी। वह ऐसी शक्ल बनाने में भी माहिर थे जिसे बड़े पर्दे पर देखकर आप जी भर कर हंस सकते थे और ऐसी शक्ल बनाना भी उन्हें खूब आता था जिसे देख कर आप भावुक हो जाए। जितने अच्छे संवाद लिखते थे उससे भी कहीं अच्छे ढंग से उसे बड़े पर्दे पर परोस दिया करते थे। बहुत कठिन होता है वह काम जो कादर खान अपनी प्रतिभा के दम पर आसानी से कर दिया करते थे।

साल 2019 की पहली सुबह यह बहुत बुरी खबर लेकर आई कि प्रसिद्ध चरित्र और हास्य अभिनेता कादर खान नहीं रहे। इस खबर से बॉलीवुड को तो धक्का और सदमा लगा ही उन लोगों को भी दुख पहुंचा जिन्हें अपने अभिनय और संवाद के माध्यम से कादर खान हंसाते, गुदगुदाते और रुलाते आए थे। सदी के महानायक अमिताभ बच्चन ने कादर खान को याद करते हुए अपने ट्वीट में महत्वपूर्ण बात कही है – उम्दा मंच कलाकार और फिल्म का संपूर्ण हुनर थे कादर खान। प्रसिद्ध अभिनेता अनुपम खेर ने भी कहा है- कादर खान एक ऐसे विद्वान थे जो किसी भी विषय पर बात कर सकते थे। फिल्म जगत की और भी बहुत सारी हस्तियों ने इसी रूप में कादर खान को याद किया है। यह संदेश बताते हैं कि कितना बड़ा कलाकार दुनिया से कूच कर गया है। चलते- चलते उनका एक संवाद जो बहुत मशहूर है याद आता है- पीछे नहीं जाने का, पीछे जाने से गुजरा हुआ वक्त लौट के नहीं आता।

लेखक Ghamasan.com के संपादक हैं।

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