हौसले को सलाम, ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ दी सिविल सेवा की परीक्षा

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तिरुवनंतपुरम: ‘लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती , कोशिश करने वालों की हर नहीं होती’, ये लाइन आपने हमेशा सुनी होगी लेकिन इसे सच कर दिखाया है केरल की लतीशा अंसारी ने। हड्डियों की गंभीर बीमारी और सांस लेने में परेशानी भी लतीशा के हौंसलों को डिगा नहीं सकी। रविवार को लतीशा ने व्हीलचेयर पर एक ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ सिविल सेवा प्रीलिम्स की परीक्षा दी।

लतीशा का कहना है कि वह पीछे डेढ़ साल से संघ लोकसेवा आयोग (यूपीएससी) की इस प्रतिष्ठित परीक्षा की तैयारी कर रही हैं और उन्हें आशा है कि उनकी कोशिशें सार्थक होंगी।

इन बीमारियों से है ग्रसित

लतीशा जन्म के बाद से ही ‘टाइप 2 ओस्टियोजेनेसिस इमपरफेक्टा’ नाम की बिमारी से ग्रसित है। इसके अलावा पिछले करीब एक साल से वह संस की बिमारी से जूझ रही है, जिसके चलते उन्हें ऑक्सीजन सिलेंडर की जरूरत पड़ती है। कोट्टायम जिला कलेक्टर पीआर सुधीर बाबू के हस्तक्षेप के चलते परीक्षा भवन के अंदर लतीशा को ‘ऑक्सीजन कॉंसेंट्रेटर’ उपलब्ध कराया गया।

आनुवांशिक विकार से ग्रस्त बच्चों के लिए काम करने वाली एक संस्था अमृतवर्षिनी की लता नायर ने कहा कि लतीशा जैसी अभ्यर्थियों को यूपीएससी द्वारा बेहतर सुविधाएं दिए जाने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि लतीशा को मेडिकल जरूरतों के लिए हर महीने करीब 25,000 रुपए की जरूरत है। यूपीएससी ने देश भर के 72 शहरों में रविवार को सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा आयोजित की।

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