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गोपालगंज से रायसीना तक लालू की राजनीतिक यात्रा | Lalu’s political journey from Gopalganj to Raisina

Posted on: 09 Apr 2019 14:45 by Mohit Devkar
गोपालगंज से रायसीना तक लालू की राजनीतिक यात्रा | Lalu’s political journey from Gopalganj to Raisina

सुरेंद्र किशोर

महान नाटककार और कुशल राजनीतिज्ञ नोबल पुरस्कार विजेता जार्ज बर्नार्ड शाॅ @[email protected]ने कहा था कि
‘सारी आत्म कथाएं झूठी होती हैं।’
शाॅ ने यह भी कहा कि ‘मेरा मतलब अनजाने और अनभिज्ञता में लिखे गए झूठ से नहीं है, बल्कि सुविचारित ढंग से लिखे गए झूठ से है।’
वह भी जब किसी सक्रिय राजनेता की आत्म कथा हो, और वह भी लालू प्रसाद जैसों की हो, तब तो कई लोगों को बर्नार्ड शाॅ याद आएंगे ही।
वैसे मैं इतना ही कहूंगा कि लालू प्रसाद अपने राजनीतिक जीवन काल में जितने सत्य,अर्ध सत्य या असत्य का सहारा लेते रहे हैं, वैसी ही बातें तो उनकी आत्म कथा में भी होंगी ! उससे अधिक या कम की उम्मीद किसी को भला क्यों करनी चाहिए ?
उनका पूरा जीवन एक खुली किताब है।
पर कई लोग लालू प्रसाद पर आई इस चर्चित किताब के लेखक नलिन वर्मा से कुछ अधिक ही नाराज नजर आ रहे हैं।
यह नाराजगी अकारण है।दूत तो अबद्ध होता है।
वर्मा ने भी कहा है कि ‘यह किताब न तो प्रशंसा में लिखी गई है और न ही उन पर कोई शोध करके लिखी गई है।’
दरअसल लालू प्रसाद ने अपने जीवन व राजनीति के बारे में जो कुछ बताया,उसे नलिन वर्मा ने लिपिबद्ध किया।
वैसे भी बर्नार्ड शाॅ ने एक और मार्के की बात कही है,
‘सच होना खतरनाक है,जब तक कि आप मूर्ख भी न हों।’
वैसे कोई अन्वेषणकत्र्ता लेखक -पत्रकार चाहे तो उसके लिए बहुत गुंजाइश अभी बची हुई है।
लालू प्रसाद जैसे बड़े व प्रभावकारी नेता के बारे में अभी बहुत सारी अनकही बातें बाहर आनी बाकी हैं।
याद रहे कि मैं लालू प्रसाद को 1969 से जानता हूं।

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