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पाटलिपुत्र का रण और लालू की बेटी की उलझन के कारण | Lalu Yadav daughter ‘Misa Bharti’ contest Election from Pataliputra

Posted on: 05 May 2019 17:04 by Surbhi Bhawsar
पाटलिपुत्र का रण और लालू की बेटी की उलझन के कारण | Lalu Yadav daughter ‘Misa Bharti’ contest Election from Pataliputra

सत्रहवीं लोकसभा के चुनाव बिहार औऱ उसमें भी लालू प्रसाद कुनबे के लिए खास है। बीते विधानसभा चुनाव के बाद यहां की सियासी गंगा में बहुत पानी बह गया। लालू के साथ मिलकर चुनाव लड़ने वाले ने नीतिश कुमार ने घोर विरोधी भाजपा के साथ हाथ मिलाकर लालू कुल को सत्ता से बाहर कर दिया। इसी बीच लालू यादव जेल ऐसे गए कि जमानत तक नहीं मिली। जेल के नाम पर अस्पताल तक की ही आजादी चुनिंदा दिनों के लिए मिल सकी। लोकसभा चुनाव की बिसात बिछी तो दो बेटे तेजस्वी और तेजप्रकाश ही एक-दूजे से उलझ लिए।

इन सारी उलझनों के बीच पाटलिपुत्र सीट से बेटी मीसा भारती कभी लालूजी के ही करीबी रहे रामकृपाल यादव के साथ चुनावी मुकाबले में है। राजनीति के इस रण की चर्चा के कई कारण है। पाटलिपुत्र देश के उन एतिहासिक शहरों में शुमार है जो दो हजार साल पहले ही शिक्षा-कारोबार आदि के लिए सारी दुनिया में ख्यात थे। पाटलिपुत्र का ही बिगड़ा नाम पटना है। अब तो यहां पाटलिपुत्र नाम का एक रेलवे स्टेशन ही बतौर यादगार है।

वैसे सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य ने अपना साम्राज्य यही से स्थापित किया था। यहां दो लोकसभा सीटें हैं एक पटना साहिब और दूसरी पाटलिपुत्र। पटना साहिब से भाजपा छोड़ कांग्रेस में गए शत्रुघ्न सिन्हा और भाजपा के दिग्गज रविशंकर प्रसाद का मुकाबला जोरों पर है। वहीं पाटलिपुत्र में मीसा के माध्यम से लालू कुल की इज्जत दांव पर है। दरअसल, मीसा के मोह के कारण ही रामकृपाल ने लालू खेमा छोड़कर भाजपा का दामन थामा था। वे एक बार मीसा को हरा भी चुके हैं।

वैसे 2008 के परिसीमन के बाद बनी इस सीट पर पहला चुनाव 2009 में हुआ था। तब जनता दल युनाइटेड के उम्मीदवार डॉ. रंजन यादव ने खुद लालूजी को शिकस्त दी थी। 2014 के चुनाव में मीसा ने यह सीट चालीस हजार से भी ज्यादा मतों के अंतर से गंवाई। यहां सबसे ज्यादा मतदाता भूमिहार औऱ यादव है, लिहाजा जातीय समीकरण का ऊंट किस करवट बैठेगा इसका आकलन जरा मुश्किल है। जदयू और भाजपा के खट्टे-मीठे संबंधों के चलते मोदी लहर जैसी कोई बात यहां नजर नहीं आती। वहीं लालूजी की अनुपस्थिति के कारण राजद भी परेशानी महसूस कर ही रहा है। बढ़ते अपराध, बेरोजगारी, कम रेल सुविधाएं, सिंचाई के संसाधनों का बुरा हाल और गंगा नदी पर स्थायी पुल की ललक यहां के चुनाव मुद्दे हैं, लेकिन निर्णायक नहीं।

 

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