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लद्दाख की साख, अनेक देशों से बड़ा चुनाव क्षेत्र | Ladakh’s constituency bigger than many countries

Posted on: 28 Mar 2019 11:57 by Surbhi Bhawsar
लद्दाख की साख, अनेक देशों से बड़ा चुनाव क्षेत्र | Ladakh’s constituency bigger than many countries

भारत का पड़ोसी देश मालदीव तीन सौ वर्ग किलोमीटर से भी कम में बसा है। वहीं विश्व प्रसिद्ध हांग कांग का इलाका भी 1100 वर्ग किलोमीटर तक नहीं पहुंचता, लेकिन यदि आकार के लिहाज से देश के सबसे बड़े लोकसभा क्षेत्र की बात करें तो सामने आता है लद्दाख का नाम। हिमालय की वादियों में बसा यह लोकसभा क्षेत्र पौने दो लाख वर्ग किलोमीटर में फैला है। भारत-पाकिस्तान की नियंत्रण रेखा यानी एलओसी पर बसा यही लोकसभा क्षेत्र कारगिल की रणभूमि भी था। प्रशासनिक दृष्टि से यह दो जिलों कारगिल और लेह में बसा है।

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हिमाच्छादित वादियां इतनी सुंदर कि सारी दुनिया के पर्यटक सुकून की तलाश में यहां तक चले आते हैं। हालांकि काररगिल युद्ध के बाद से ही यहां माहौल अस्थिरता का है। यह भी कारगिल युद्ध का ही प्रताप कहा जा सकता है कि यहां 2004 में बतौर निर्दलीय सांसद लोकसभा में पहुंचे थुपस्तान छेवांग 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर के चलते पहली बार कमल खिला।

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भारतीय जनता पार्टी के थुपस्तान छिवांग निर्वाचित हुए। हालांकि उनका और भाजपा का नाता लंबा नहीं रहा औऱ उन्होंने 2018 बीतने से पहले ही पार्टी छोड़ दी। वैसे छिवांग ने 2014 का चुनाव महज 36 वोटों से ही जीता था। तब उनका मुकाबला निर्दलीय गुलाम रजा से हुआ था। यह सीट कभी किसी दल विशेष से बंधी नहीं रही। कभी कांग्रेस तो कभी नेशनल कॉन्फ्रेंस और कभी निर्दलीय उम्मीदवार यहां से लोकसभा में पहुंचते रहे।

Thupstan Chhewang

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देश में महिला नेतृत्व को सामने लाने की बातें तो बहुतेरी की जाती है, लेकिन इस क्षेत्र ने इस पर अमल किया। 1977 में यहां से पार्वती देवी सांसद बनी थीं। उन्हें मिलाकर इस क्षेत्र में पांच बार कांग्रेस का झंडा लहराया तो दो बार नेशनल कॉन्फ्रेंस का। दो बार निर्दलीयों ने भी बाजी मारी। 2014 में ही हुए विधानसभा के चुनाव में यहां की चार सीटों में से तीन लेह, कारगिल व नोबरा पर कांग्रेस प्रत्याशी चुने गए। चौथी सीट जानस्कार निर्दलीय के खाते में गई। इस क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या भी लगभग पौने दो लाख ही है। यानी प्रति वर्ग किलोमीटर एक मतदाता का औसत बनता है।

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