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कितने नाम और बतलाऊ माँ, मैं तेरे इस दुनिया को

Posted on: 12 May 2018 09:50 by krishna chandrawat
कितने नाम और बतलाऊ माँ, मैं तेरे इस दुनिया को

माँ मूरत है, धरती पर भगवान की सूरत है,
माँ तू कुदरत की बनायी इक बेहतरीन दौलत है।

माँ तू त्याग है, बलिदान है, शाश्वत है, समर्पण है,
माँ तुझसे ही इस सृष्टि का नव निर्माण है।

माँ तू वसंत है, ग्रीष्म है, वर्षा है, शरद है, हेमंत है, शिशिर है,
माँ तू तो कालखंड की ऋतु इक अमर है।

माँ तू गंगा है, जमना है, सरस्वती है,
माँ तू विष्णु में लक्ष्मी और शिव में पार्वती है।

माँ तेरा हर इक-इक रूप बड़ा ही बेमिसाल है,
माँ तू हम बच्चों की द्वारपाल है।

माँ तेरे संग होने पर मुझे किस बात की कमी है,
माँ तेरा आशिर्वाद हमारे लिये चिरंजीवी है।

माँ तेरे आगे सारा जग ये निर्बल है,
माँ तू फिर भी कितनी पावन और निर्मल है।

माँ मैं तेरा जाग्रत स्वपन और मुझमे तेरा ही आकर है,
माँ तुझे मिलाकर ही तो मेरा सपरिवार है।

माँ शब्द कम पड़ रहें हैं, तेरे लिये इस ‘कृष्णा’ को,
माँ कितने और अर्थ बतलाऊँ, तेरे नाम के इस दुनियां को।

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