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मेरा आंकलन ! मप्र में कांग्रेस को 115 से 125 सीटें

Posted on: 07 Dec 2018 22:52 by mangleshwar singh
मेरा आंकलन ! मप्र में कांग्रेस को 115 से 125 सीटें

कीर्ति राणा की कलम से
शुक्रवार की रात जी न्यूज एमपी सीजी पर चुनावी आंकलन में इंदौर से मैं शामिल था। साथ में पत्रकार मित्र हेमंत पाल भी थे। मुझ से इंदौर की सीटों, मालवा-निमाड़ और मप्र में सीटों के आंकलन पर प्जानकारी ली गई। मेरा आंकलन कुछ इस तरह से था : मप्र में कांग्रेस को 115से 125 सीटें,इसमें मालवा-निमाड़ क्षेत्र में 30 सीटें, इंदौर में 3-4 सीटें कांग्रेस को मिलने की संभावना ।
🔹इस बार मप्र में कांग्रेस को सत्ता मिलती नजर आ रही है, उसे 115-125 तक सीटें मिल सकती हैं। बसपा सहित जो भी निर्दलीय जीतेंगे वो कांग्रेस का हाथ थाम सकते हैं। मप्र में सरकार बनाने की चाबी मालवा-निमाड़ क्षेत्र की 66 सीटें तय करती हैं।
🔹2013 में भाजपा को 56 ( 9 कांग्रेस, 1 निर्दलीय, बाद में भाजपा में शामिल), 2008 में 45 भाजपा (25 कांग्रेस, बाकी अन्य दल) को मिली थीं। 2013 में 66 में से कम से कम 30 सीटें कांग्रेस को मिल रही हैं ।
इंदौर जिले में अधिकतम 3 सीटें कांग्रेस को
🔹इसी तरह इंदौर+महू कुल 9 में से कम से कम तीन सीटें देपालपुर, सांवेर, महू कांग्रेस को मिल रही हैं। दो सीटों एक नंबर और तीन नंबर पर भी चौंकाने वाले परिणाम आ सकते हैं। पिछले चुनाव में भाजपा को 8, कांग्रेस को एक (राऊ) सीट मिली थी।
मप्र में बदलाव हुआ तो कारण यह रहेंगे-
🔹मप्र में हुए किसान आंदोलन का सर्वाधिक असर इन्हीं 66 सीटों पर रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में भरपूर मतदान का मतलब है किसानों की नाराजी, कांग्रेस के घोषणा पत्र में किसान हितैषी बातें।
🔹मप्र सरकार के खिलाफ अंदर ही अंदर पनपता असंतोष, आम भाजपा कार्यकर्ता भी अपनी उपेक्षा से नाराज। सरकार का इवेंट कंपनी में तब्दील होना। अधिकारियों का हावी होना। मुख्यमंत्री चौहान का आयएएस/आयपीएस पर निर्भर रहना। मंत्रियों-विधायकों के काम नहीं होना।
🔹एट्रोसिटी एक्ट को लेकर भाजपा से नाराजी और सीएम का दलितों के हित में दिया-वॉयरल वीडियो-बयान कोई माई का लाल…।
🔹शहरी क्षेत्रों में महिलाओं के अधिक मतदान प्रतिशत का कारण गैस की टंकी के बढ़ते दाम, महंगाई का किचन पर असर, पेट्रोल-डीजल के दाम में वृद्धि।
🔹नोटबंदी, जीएसटी से चौपट हुआ बाजार, धंधे ठप होने की चिंता का असर घर घर।
🔹 मुस्लिम वर्ग का चौंकाने वाला मतदान, भाजपा के पक्ष में तो कतई नहीं हुआ है। तीन तलाक के बहाने मजहब/शरीयत में दखल से नाराजी। असुरक्षा का भाव। देश में गोकशी सहित हमले की घटनाओं में मोदी/ केंद्र की चुप्पी।
🔹भाजपा कहती है कि पिछली बार की तरह इस बार भी ज्यादा मतदान उसके हित में है तो यह भी याद रखना चाहिए कि इस बार बसपा, सपा, आप और सपाक्स ने भी लगभग सभी सीटों पर प्रत्याशी खड़े किए थे तो ये सारे दलों के प्रत्याशी भाजपा के ही वोट काटेंगे।

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