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प्रयागराज से मैदान में किन्नर महामंडलेश्वर भवानी मां | Kinnar Mahamandaleshwar Bhavani Maa in the Election field from Prayagraj

Posted on: 03 Apr 2019 12:30 by Surbhi Bhawsar
प्रयागराज से मैदान में किन्नर महामंडलेश्वर भवानी मां | Kinnar Mahamandaleshwar Bhavani Maa in the Election field from Prayagraj

किन्नरों में समय के साथ अधिकारों को लेकर जागरूकता बढ़ती जा रही है। देश के हृदय प्रदेश मध्यप्रदेश में किन्नर शबनम मौसी सोहागपुर विधानसभा सीट से विधायक निर्वाचित हो चुकी हैं। इसी तरह कमला जान कटनी की महापौर भी रह चुकी हैं, लेकिन आजाद भारत के इतिहास में कोई किन्नर संसद में नहीं पहुंचा, शायद इस बार पहुंच जाए।

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हाल ही में संपन्न इलाहाबाद (प्रयागराज) महाकुंभ में किन्नरों के अखाड़े को चौदहवें अखाड़े के रूप में मान्यता मिली और वहां आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी के नेतृत्व में किन्नरों का भव्य पांडाल सजा। इसी अखाड़े में नंबर दो पर है महामंडलेश्वर भवानी मां वाल्मीकि। उन्होंने महामंडलेश्वर तक की जीवन यात्रा सहज ही पूरी नहीं की। वे मूलतः हिंदू थीं, फिर मुस्लिम बनी और हज यात्रा तक कर आईं। उसके बाद दोबारा हिंदू बनी और 2017 में स्वामी वासुदेवानंद ने उन्हें महामंडलेश्वर से विभूषित किया।

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1972 में देश की राजधानी दिल्ली की चाणक्यपुरी में जन्मी भवानी नाथ के आठ भाई बहन थे। परिवार विपन्न था और 13 साल की उम्र में उन्हें किन्नर होने का पता चला तो घर छोड़ दिया। उनकी पहली गुरु हाजी नूरी थीं, जिनकी प्रेरणा से इस्लाम धर्म अपनाया और शबनम बन गईं। बतौर मुस्लिम रमजान में रोजे रखे और 2012 में हज यात्रा करने भी गई। पांच साल तक मुस्लिम रहकर फिर हिंदू धर्म अपनाया और नाम हो गाय भवानी मां वाल्मीकि।

वे 2016 में अखिल भारतीय हिंदू महासभा के किन्नर अखाड़े में धर्मगुरु बनी थीं। आम आदमी पार्टी यानी आप जिस तरह की प्रयोगवादी राजनीति करती है और किन्नरों को लेकर समाज में जागरूकता बढ़ रही है, उसे देखते हुए भवानी मां राजनीतिक पायदान पर कैसे सफलताएं हासिल करती है यह देखने वाली बात होगी। इतना जरूर है कि उनके चुनाव अभियान में सारे देश के किन्नर जुटेंगे और अपनी खास शैली में घर-घर जाकर वोट की दुआएं मांगेगे। इससे चुनाव दिलचस्प जरूर होगा।

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@जोग लिखी

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