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इनी बातो को रखनो ध्यान

Posted on: 05 Nov 2018 08:27 by Mohit Devkar
इनी बातो को रखनो ध्यान

सग्ला भाई-बेना के दिवाली की राम – राम ने घणी सारी बधई । दिवाली खुशी को तेवार है । चारी तरफ उमंग है । कोई नवा कपड़ा लत्ता तो कोई घर को नवो समान ली रियो है । दिवाली का दन लछमी जी की पूजा का बाद सगला मनक ना फटाका – फुलझड़ी छोड़ी ने खुशी मनाएगा । पर इनी खुशी का साथ भई-बेन ना इनी बात को ध्यान रखनो है पटाखा छोडवा से कम से कम ध्वनि और वायु प्रदूषण वे । वायु प्रदूषण से जिन लोगा नो आस्थमा की तकलीफ है वो और बड़ी जाय है और उनको दम चलवा लगे है । फटाका छोड़्ती बखत ध्यान रखनू हैं कि जीव जनावर ने परेशान नी करनू है। कईं शरारती लोग टेगड़ा, गदड़ा ने ढोर ना की पूछ पे लड़ बांधी ने छोड़े है, भोत गलत बात है । पटाखा फोड़्ता बखत ध्यान रखनू है कि नया नायलोन का और ढीला ढाला कपड़ा नी वे, पास में एक बाल्टी पानी भरने रखे कदी आग लगी जावे तो बचवा सारु । हाँ स्वच्छ्ता को भी ध्यान रखनू है और सवेरे सड़क से कचरो – बगदो भेलो करी ने कचरा गाड़ी में डालनू नी भूलनो है ।

– देवेंद्रसिंह सिसौदिया

लेखक, साहित्कार और लघु कथाकार हैं। उन्होंने खास तौर पर ghamasan.com के लिए मीठी बोली मालवी में दीपावली पर यह लिखा है।

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