भयानक आपदा झेलने के बाद केदारनाथ धाम का नया रूप, देखे फोटोज

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after terrible natural disaster in 2013, see new look of kedarnath.

साल 2013 में भयानक प्राकृतिक आपदा के बारे मे हम सब जानते है। यह आपदा झेलने वाला मंदिर और आसपास के परिसर की मरम्मत का काम तेजी से चल रहा है और माना जा रहा है कि अक्टूबर तक यह नई सेवाओं के साथ पूरी तरह तैयार हो जाएगा। तस्वीरों में देखें, केदारनाथ धाम का बदलता स्वरूप

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केदारनाथ धाम जल्द ही नए स्वरूप में लोगों के सामने होगा। माना जा रहा है कि अक्टूबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केदारनाथ के दौरे पर आ सकते हैं। ऐसे में उनके आने से पहले सभी काम पूरे करने के लिए जोर-शोर से कवायद जारी है।

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मुख्य सचिव उत्पल कुमार केदारनाथ की मरम्मत का काम जांचने पहुंचे हैं। धाम में निर्माणाधीन रेप्लिका, रास्तों, पुलों, उद्धव कुंड, भैरव मंदिर और रास्तों आदि का निरीक्षण कर उन्होंने जरूरी निर्देश भी जारी किए हैं।

मंदिर से लेकर आसपास के इलाके तक की मरम्मत
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सूत्रों ने बताया है कि आने वाले दिनों में यात्रियों की संख्या बढ़ेगी। इसलिए, यात्रियों की सुविधा के लिए सभी काम जल्दी पूरे किए जाएं। यात्रियों की संख्या बढ़ने से राज्य की अर्थव्यवस्था को होने वाले फायदे पर सभी की नजर है।

2013 की आपदा के बाद केदारनाथ धाम को मिली नई सूरत, देखें तस्वीरें
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मंदिर से लेकर आसपास के इलाके तक की मरम्मत बहुत अच्छे से की जा रही है. मुख्य सचिव ने वीआईपी हैलीपेड से मंदिर के रास्ते तक स्थानीय पत्थर बिछाने, मंदिर के बगल में बनाए जा रहे रेप्लिका के मुख्य द्वार पर पारदर्शी शीट लगाने के निर्देश दिए हैं, जिससे लोग आसानी से रेप्लिका को देख सकें।

फिर से खड़ा होने को तैयार
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हीं, केदारनाथ के लिए दूसरे चरण की हेलिकॉप्टर सेवाएं शुरू हो गई हैं। फिलहाल तीन कंपनियों ने सेवाएं देनी शुरू की हैं। हालांकि, अभी भी केदारनाथ धाम का मौसम पूरी तरह से इसके लिए अनुकूल नहीं हुआ है। पहले चरण में केदारनाथ धाम के लिए 13 कंपनियों ने अपनी सेवाएं दी थी।

पीएम मोदी कर सकते हैं दौरा
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साल 2013 में बादल फटने और कई दिन की भारी बारिश से आई बाढ़ का असर केदारनाथ धाम और केदार घाटी पर बुरी तरह से पड़ा। हालांकि, मंदिर को खास नुकसान नहीं हुआ लेकिन परिसर में भूस्खलन का मलबा पानी के साथ आ पहुंचा। मंदिर में पानी बुरी तरह से भर गया और आसपास का इलाका बड़े-बड़े पत्थरों से पट गया। कई लोगों की जान मंदिर में फंसे होने के कारण चली गई थी।

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