अधूरा रह जाता है करवा चौथ का व्रत, जरुर पड़े कथा

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कार्तिक कृष्ण चतुर्थी तिथि को करवा चौथ का व्रत किया जाता है। हिंदू धर्म में सुहागिन महिलाओं के लिए इस व्रत का विशेष महत्व है। कुवांरी कन्याएं भी अच्छे पति की प्राप्ति के लिए इस व्रत को करती हैं। ये व्रत रखने वालों को पूरी तरह संतुष्ट और खुश रहना चाहिए। बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें किसी का दिल ना दुखाए ना गुस्सा करे। इस दिन ध्यान रखे सफेद चीजें दान में न दें। इस दिन पूजा के साथ ही व्रत कथा का भी विधान है। माना जाता है कि व्रत कथा को सुनने से व्रत का पूरा फल प्राप्त होता हैं। और जो भी व्रत करने वाली महिला इस कथा को नहीं सुनती है उसे व्रत का फल नही मिलता है।

आइए जानते है क्या है इस व्रत की पौराणिक कथा…

प्राचीन समय की बात है, एक करवा नाम की पतिव्रता स्त्री अपने पति के साथ एक गांव में रहती थीं जो नदी किनारे बसा था। एक दिन जब इनके पति नदी में स्नान कर रहे थे तब एक मगरमच्छ ने उनका पैर पकड़ लिया और उसे गहरे पानी में ले जाने लगा। मृत्यु को करीब देखकर करवा के उसको को नाम लेकर पुकारने लगे। संकटग्रस्त पति की आवाज सुनकर करवा नदी तट पर दौड़ कर पहुंची और पति को मृत्यु के मुख में देखकर क्रोधित हो गईं।

मगरमच्छ उसे गहरे जल में ले जाने की कोशिश कर रहा था। सती करवा ने अपनी शक्ति से एक कच्चे धागे से मगरमच्छ को बांध दिया और कहा कि अगर मेरा पतिव्रत धर्म सच्चा है तो मगरमच्छ मेरे पति को हानी नहीं पहुंचा सकता। इसके बाद वहां उपस्थित हुए यमराज ने करवा से कहा कि तुम मगरमच्छ को मुक्त कर दो। इस पर करवा ने कहा कि आप मगरमच्छ को मृत्युदंड दीजिए और मेरे पति की रक्षा कीजिए इसने मेरे पति को मारने का प्रयत्न किया है।

मगरमच्छ की आयु शेष थी अत: यमराज ने कहा कि अभी मैं उसे नहीं मार सकता। इस पर करवा ने यमराज से अपने पति के प्राण न हरने की प्रार्थना करते हुए कहा कि मैं अपने सतीत्व के बल पर आपको अपने पति के प्राण नहीं ले जाने दूंगी, आपको मेरी विनय सुननी ही होगी। इस पर यमराज ने कहा कि तुम पतिव्रता स्त्री हो और मैं तुम्हारे सतीत्व से प्रभावित हूं। ऐसा कहकर यमराज ने मगरमच्छ के प्राण ले लिए और करवा के पति को दीर्घायु का वरदान मिला।
हे करवा माता! जैसे तुमने अपने पति की रक्षा की, वैसे सबके पतियों की रक्षा करना

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