करतारपुर कॉरिडोर के खुले द्वार, फिर भी हजारों श्रद्धालु नहीं टेक पाएंगे मत्था

श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व के मौके पर भारत-पाकिस्तान के बीच दरार बनी दीवार को तोड़ते हुए करतारपुर साहिब कॉरिडोर खोल दिया गया। हालांकि ये कॉरिडोर खुलने के बाद भी हजारों सिख करतारपुर साहिब गुरुद्वारे के दर्शन के लिए नहीं जा पाएंगे।

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नई दिल्ली: भारत और पाकिस्तान के बीच करतारपुर कॉरिडोर शुरू हो गया है। सालों से इंतजार कर रहे भारतीय सिखों कीख्वाहिश शनिवार, 9 नवंबर को पूरी हो गई। श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व के मौके पर भारत-पाकिस्तान के बीच दरार बनी दीवार को तोड़ते हुए करतारपुर साहिब कॉरिडोर खोल दिया गया। हालांकि ये कॉरिडोर खुलने के बाद भी हजारों सिख करतारपुर साहिब गुरुद्वारे के दर्शन के लिए नहीं जा पाएंगे।

दरअसल, पाकिस्तान ने करतारपुर जाने के लिए पासपोर्ट की शर्त रख दी है ज्सिके कारण हजारों सिख करतारपुर साहिब में मत्था टेकने का सपना पूरा नहीं कर पाएंगे। ऐसे श्रद्धालुओं के पास डेरा बाबा नानक में खड़े होकर हाथ जोड़कर प्रार्थना करने के अलावा कोई उम्मीद नहीं है।

करतारपुर साहिब न जाने वाले हजारों श्रधालुओं में एक 75 साल की जसवीर कौर भी है। उनका कहना है कि मेरे पति के पास पासपोर्ट है और वह दो बार करतारपुर साहिब होकर आए हैं, लेकिन अब मैं भी चाहती हूं कि पासपोर्ट बनवा लूं।

एक अन्य श्रद्धालु का कहना है कि हमें इस बात की खुशी है कि करतारपुर कॉरिडोर खुल गया है। हम दोनों सरकारों का धन्यवाद करना चाहते हैं लेकिन एक प्रार्थना है कि जो पासपोर्ट की शर्त लगाई है वह सही नहीं है। क्योंकि एक परिवार में केवल एक-दो सदस्यों के पास ही पासपोर्ट होता है। कॉरिडोर खुलने का असली फायदा तभी मिलेगा, जब हमसे पासपोर्ट न मांगा जाए।

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