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कपिल जब तक क्रीज पर हैं…

Posted on: 06 Jan 2019 10:38 by Pawan Yadav
कपिल जब तक क्रीज पर हैं…

 मुकेश तिवारी
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टेलीविजन उस वक्त कम ही आया था। रेडियो खासा लोकप्रिय हुआ करता था। लोग कान में ट्रांजिस्टर लगाए नजर आएं तो समझ आ जाता था कि क्रिकेट मैच की कॉमेंट्री चल रही है। राह चलते लोग एक-दूसरे से मैच का हाल पूछ लिया करते थे। मुझे याद है प्रसिद्ध कॉमेंटेटर सुशील दोषी की वह लाइनें – भारत हार की कगार पर खड़ा है पर जब तक कपिल क्रीज पर हैं कुछ भी कहना मुश्किल। फिर वह कभी मैच का आंखों देखा हाल सुनाते हुए यह भी कहते थे कि और कपिलदेव आउट भारत की जीत की उम्मीद खत्म।

आप समझ रहे हैं मैं क्या कहना चाह रहा हूं। भारत की जीत और हार कपिल देव के क्रीज पर डटे होने या आउट हो जाने से तय हुआ करती थी। कपिल अगर बल्ला थामे क्रीज पर खड़े हो तो कोई भी यह भविष्यवाणी करने की स्थिति में कतई नहीं होता था कि मैच में आगे क्या होने वाला। कॉमेंटेटर सुशील दोषी ही नहीं आम क्रिकेट प्रेमी भी यह कहते सुने और पाए जाते थे कि अभी कपिल क्रीज पर है ना। राह चलते लोग भी पूछते थे क्या स्कोर हुआ भारत हार रहा अच्छा कपिल की बैटिंग आई कि नहीं? कपिल का आना अभी बाकी है मतलब मैच में भारत की उम्मीदें बाकी हैं। किसी भी खिलाड़ी को लेकर ऐसा विश्वास तभी जागता है जब वह अनेक मौकों पर कमाल का प्रदर्शन कर अपनी टीम को जीत दिलाता आया हो।

कपिल ने ऐसे कमाल के प्रदर्शन किए और दुनिया भर में उसे सराहना मिली। भारतीय क्रिकेट की दशा और दिशा बदलने वाले कप्तान में हम सबसे पहला नाम कपिलदेव का लिख सकते हैं। याद कीजिए इंग्लैंड में 1983 में खेला गया क्रिकेट का विश्व कप। क्रिकेट के तमाम पंडित भारत की टीम को कुछ गिन ही नहीं रहे थे। सेमीफाइनल में हमारा पहुंचना चमत्कार माना जा रहा था। कहा जा रहा था कि बस अब इंग्लैंड सामने है तो सफर यहीं थम जाएगा। कपिल के नेतृत्व में इंग्लैंड को हराकर भारत ने जब विश्व कप के फाइनल में कदम रखा तो क्रिकेट की दुनिया हिल गई थी। फाइनल में उस वक्त की सबसे खूंखार और मजबूत टीम विश्व विजेता वेस्टइंडीज से सामना था।

फाइनल मैच के पहले यह आकलन शायद किसी ने नहीं किया था कि हम क्रिकेट की दुनिया के नए चौधरी बनने जा रहे हैं। हमने कर दिखाया क्योंकि हमारा कप्तान वह कपिल देव था जिसने मौका पड़ने पर महत्वपूर्ण लीग मैच में जिंबाब्वे के खिलाफ अकेले ही 175 रन ठोक डाले थे। वह कपिलदेव जिसने फाइनल मैच में लंबी दौड़ लगाते हुए विवियन रिचर्ड्स का कैच ही नहीं मैच और विश्व कप भी पकड़ लिया था। उसके बाद भारतीय क्रिकेट टीम ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। जीत की ऐसी आदत डली की जो टीम कभी एकदिवसीय क्रिकेट में दो-चार जीत के लिए तरसा करती थी उसने जीत के रिकॉर्ड बना डाले। आज इस महान हरफनमौला खिलाड़ी का जन्मदिन है। कपिलदेव जैसा खिलाड़ी वास्तव में बरसों में कहीं एक जन्म लेता है।

लेखक घमासान डॉट कॉम के संपादक हैं

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