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यहां खिले हैं चारों ओर कमल ही कमल

Posted on: 06 Dec 2018 14:33 by Ravindra Singh Rana
यहां खिले हैं चारों ओर कमल ही कमल

राजेश दुबे

इंदौर शहर के पश्चिमी छोर पर जब हम एयरपोर्ट से आगे बढ़ते है तो चारों ओर हरियाली ही हरियाली नजर आती है, कमल ही कमल खिले दिखाई देते है। लगता है मानों किसी प्राक्रतिक स्थल पर आ गए हो। घूमने के लिए इस बार शहर की ऐसी जगह तलाशी जा रही थी, जहां पहले कभी गए नहीं और खासियत लिए भी हो। तय तो फिर भी नहीं हो पाया, पर रूट पकड़ लिया और एयरपोर्ट, बिजासन मंदिर, गोम्मटगिरि, पितृ पर्वत होते हुए हातोद पहुंचते ही लगने लगा, जो देखना चाहते हैं, वो मुकाम आने वाला है।

नागिन-सी बलखाती सड़क के दोनों ओर हरियाली अपने हाथ फैलाए खड़ी है। आसमान छूने को बेताब बांसों के घने झुंड खड़े थे। ये इतने घने हैं कि सूरज की किरण तक जमीं पर नहीं आने देते, इस कारण बारिश में डूबी इस जमीन में अभी तक इतनी नमी थी कि पैर रखते ही अंदर दबती जा रही थी। जैसे ही गुलावट की लोटस वैली पर पहुंचे, वहां से जिधर नजर गई, ठहर-सी गई। कई एकड़ में फैली लोटस वैली के तालाब में कहीं कमल ही कमल के खेत थे, तो कहीं डोंगी में बैठा किसान सिंघाड़ा निकालते नजर आ रहा था।

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जब पुल से कैमरामैन संदीप चौधरी ने ड्रोन को ऊंचाई पर पहुंचाया और क्लिक किया, तो जो कैद हुआ, वो देखते ही बनता है। ऐसा लग रहा था, किसी समुद्री इलाके में आ गए हों। चारों ओर नीला पानी और उसमें खिले कमल और सिंघाड़े की हरियाली देखते ही बनती है। ये जमीन तो वन विभाग की है, लेकिन रोजगार के लिए यहां के लोगों को दे रखी है। कुछ किसानों की जमीन भी है, जो डूब जाती है, तो वो भी यहीं कमल और सिंघाड़े की खेती करते हैं।

जब पानी सूख जाता है, तो जड़ें रख ली जाती हैं और फिर बारिश शुरू होते ही इन्हें लगा दिया जाता है। पर्यटन स्थल के हिसाब से भी इस पर ध्यान देना शुरू किया है। फिलहाल यहां प्री-वेडिंग शूट के लिए काफी लोग आते हैं, शायद इसलिए रविवार को शादी से पहले नए जोड़ों और कैमरामैनों की भीड़ यहां ज्यादा नजर आई।

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इन हरी-भरी वादियों में घोड़े की सवारी का मन हो, तो बादशाह भाई घोड़ीवाले के अफसर खान लगाम थामे मिलते हैं और लोगों को घुमाते हैं। शूट कराने आए दूल्हे को भी बरात से पहले घोड़ी चढऩे का अनुभव हो जाता है। इंदौर से पैंतीस-चालीस किलोमीटर दूर बसे इस गुलावट गांव को कुदरत ने सौगात बख्शी है।

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