प्रेम की दीवानगी का जूनून ‘कबीर सिंह’, यहां पढ़े पूरा Review

0
27

कबीर सिंह

जुनूनी प्रेम कहानी लेखक निर्देशक संदीप रेड्डी वांगा अदाकार शाहिद कपूर, कियारा आडवाणी, निकिता,सुरेश ओबेरॉय, आदिल हुसैन,अर्जुन बाजवा, सोहम मजूमदार दोस्तो दक्षिण की फिल्म 2017 में आई तेलगू फ़िल्म अर्जुन रेड्डी की रीमेक है फिल्म के लेखक निर्देशक वांगा ही थे, फ़िल्म की स्क्रीनिंग 55 बार की गई थी फ़िल्म को एडल्ट प्रमाण पत्र मिला था, बसों के पीछे लगे पोस्टर्स एक राजनेता ने हटवा दिए थे, महिला संघठन ने भी फ़िल्म का विरोध किया था, फ़िल्म में अत्यधिक प्रेम दृश्यों और क्रूरता के चलते A प्रमाण पत्र दिया था, मैं इसे तेलगू भाषा मे ही देख पाया था, फ़िल्म में मुख्य क़ीरदार विजय देवर कोंडा, शालिनी पांडे ने निभाया था, बजट 5 करोड़ और व्यापार 53 करोड़ लगभग था, फ़िल्म कूल 11 सम्मान समारोह में नामांकित हुई 3 अवार्ड्स अपने नाम किये थे,, अर्जुन रेड्डी से रीमेक कबीर सिंह, से रिमिल तमिल में बर्मा का निर्माण हो रहा है,,

इतनी जानकारी अर्जुन रेड्डी उपलब्ध थी हमारे पास ,कबीर सिंह पर चर्चा कर लेते है, कबीर किरदार के लिए रणवीर सिंह पहली अर्जुन कपूर दूसरी पसन्द थे शाहिद तीसरी लेकिन निर्देशक ने कमीने, हैदर देखी तो शाहिद पहली पसंद हो गए अदाकारा में तारा सुतारिया पहली पसंद थी उनकी व्यस्ताओं के चलते किरदार कियारा अंतिम चयन की गई,,

कहानी

मुहब्बत में जितना पागलपन और जुनून हो सकता है उसे पाने की चाहत उतनी ही कयामती हो सकती है.

एक मेडिकल स्टूडेंट है कबीर सिंह(शाहिद),जो कि हिंसक, उग्र ग़ुस्सैल मिज़ाज है सिगरेट, शराब से परहेज़ बिल्कुल नही करता है, मारधाड़ के चलते उसे कालेज से सस्पेंड कर दिया जाता है वह कालेज छोड़ कर जा ही रहा होता है कि उसे अपनी एक जूनियर प्रिती सिक्का(कियारा आडवाणी) से मुलाकात हो जाती है, वह अपनी मुहब्बत का एलान कर देता है, कबीर के हिंसक, तुनकमिजाजी के आगे कोई मुख़ालेफ़त नही होती,मुलाकात मुहब्बत में तब्दील हो जाती है,हर फिल्म में मुहब्बत को बड़ी सौम्यता से दर्शाया जाता रहा है लेकिन यहां मुहब्बत में पागलपन, जुनून, तुनकमिजाजी दिखाई गई है, कबीर दबंग मिज़ाज और प्रीति सोम्य शांत मिज़ाज की, मुहब्बत परवान चढ़ती है, कबीर परछाई की तरह प्रीति को सरक्षण के साथ खुद पढ़ाई पूरी कर सर्जन बनता है, कबीर आगे की पढ़ाई के लिए मैसूर जाता है लेकिन कबीर प्रीति दूर नही रह पाते और मुहब्बत में सारी हदें पार कर जाते है, कबीर प्रीति से शादी का रिश्ता लेकर जाता है पर उसका व्यवहार दुश्मन बन खड़ा हो जाता है,कबीर ड्रग्स, शराब में खुद को डूबो लेता हैं, जो कि खुद से नाराजगी की आसान तरीका होती है, गाने लगभग सभी खूबसूरत बने है, सभी गाने बेकग्राउंड में रखे गए है, मिथुन ने संगीत बद्ध किया, बेख्याली, तुझे इतना चाहने लगेंगे, कैसे हुआ कर्णप्रिय है| पार्श्व संगीत में बदल नही है अर्जुन रेड्डीका ही परोसा गया है, पहला हाफ मुहब्बत में कब निकल गया पता ही नहीं पडता, लेकिन दूसरे हाफ में विरह- वियोग को लम्बा खिंचा गया है यह एक गाने के माध्यम से छोटा किया जा सकता था, फ़िल्म की लंबाई 172 मिंट दूसरे हाफ में खलती है जिसे 25 मिंट छोटी किया जा सकता था,,

क्यो देखे फ़िल्म

एक नया अंदाज़ मुहब्बत को पेश करने का, ज़िद्दी, अकडू, ग़ुस्सैल, तुनक, श्रृंगार(प्रेम) सबसे ऊपर , निर्देशक सन्दीप रेड्डी वांगा कामयाब हुवे है.

पटकथा बेहद कसी हुई है

शाहिद ने सात्विक(किरदार को जिया)अभिनय से अपनी अदाकारी को एक नए आयाम पर ले गए है, हैदर, कमीने से भी कोसो आगे, इस किरदार को सम्पूर्णता से प्रस्तूत किया है, कियारा बेहद खूबसूरत लगी है वह प्रशिक्षित अदाकारा है जल्दी निखर जाएगी, अर्जुन बाजवा, सुरेश ओबेराय, सोहम मजुमदार भी अच्छा किरदार निभा गए,,कामिनी कोशल जी को देखना सुखद लगा, क्या अंत मे दोनो प्रेमी मिल पाते है जवाब के लिए फ़िल्म देखना बनती है खलता है. फ़िल्म की लंबाई 172 मिंट को छोटी की जा सकती थी, शारारिक प्रेम भी खलता है,,

व्यवसायिक

फ़िल्म को भारत 3000 स्क्रीन्स मिली है जिससे 9 से 13 करोड़ की शुरूआत मिल सकती है, निष्कर्ष प्रेम को सहजता, कोमलता सौम्यता से दिखाया गया है, लेकिन यदि प्रेम बर्बाद होता है तो आशिक किस हद तक गुज़र सकता है यह एक नया संस्करण देखने को मिला,, फ़िल्म देखी जा सकती है. फ़िल्म को 3.5 स्टार्स

समीक्षक

इदरीस खत्री

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here