पत्रकार को निष्पक्ष, साहसी और देशभक्त होना चाहिए -श्री भंडारी

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इंदौर। पत्रकार के मायने जो देशभक्त, समाज सुधारक, समाजसेवी और समाज के अंतिम व्यक्ति की चेतना को जगाता है। जो गरीबों की चिंता करे, देशहित के बारे में सोचे और देश को आगे ले जाने के लिए प्रतिबद्धता दिखाए, जो जमीन से जुड़ा है और अपनी लेखनी से जस को तस के रूप में प्रस्तुत करे, जो निर्भीक, साहसी और निष्पक्ष है वही पत्रकार है। ये विचार प्रख्यात चुनाव विश्लेषक व स्तंभकार प्रदीप भंडारी के हैं, जो उन्होंने ‘स्वस्थ लोकतंत्र में मीडिया की भूमिकाÓ विषय पर व्यक्त किए। कार्यक्रम का आयोजन विश्व संवाद केंद्र, इंदौर एवं इंदौर प्रेस क्लब के संयुक्त तत्वावधान में नारद जयंती के उपलक्ष्य में प्रेस क्लब के राजेंद्र माथुर सभागार में आयोजित किया गया।

श्री भंडारी ने आगे कहा कि कुछ वर्ष पहले तक कुछ पत्रकारों ने मान लिया था कि नकारात्मक चीजों को प्रस्तुत करना ही असली पत्रकारिता है। इसलिए वे किसी भी कार्यक्रम में मीनमेख निकालकर ही उसे प्रस्तुत करते थे, जबकि सोशल मीडिया के आने के बाद अब यह संभव नहीं। अब सबकुछ पारदर्शी हो चुका है। अगर समाज में सबकुछ ठीक चल रहा है तो मीडिया उसे अपनी मनमर्जी से प्रस्तुत नहीं कर सकता, जैसे – चुनाव के पूर्व कुछ पत्रकारों ने कहा था कि एक बार पुन: मोदी सरकार आने वाली है और उसे तीन सौ प्लस सीटें मिलेंगी और ऐसा हुआ भी। कहने का मकसद यह है कि आज पत्रकारिता बदल चुकी है। मीडिया के लोग बंद कमरे में बैठकर देश की नब्ज को नहीं पकड़ सकते, जब तक कि वे ग्राउंड पर जाकर वहां के लोगों से बातचीत नहीं करें।

उन्होंने आगे कहा कि दुर्भाग्य की बात है कि हम न्यूयार्क वल्र्ड और वाशिंगटन पोस्ट की तरह हमारी पत्रकारिता ग्लोबल वाइस नहीं बन पाई, जबकि हमारा देश सवा सौ करोड़ लोगों का है। आज इतनी बड़ी आबादी का डाटा पर नियंत्रण अमेरिका और चीन का है। पत्रकारों को लोभ में नहीं पडऩा चाहिए और अपनी बात को सही तरीके से जनता के सामने रखना चाहिए।

अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश श्री ईश्वर सहाय श्रीवास्तव ने कहा कि महर्षि नारद साहित्य के जन्मदाता थे और पत्रकार वह होता है जो समाज की पीड़ा को बखूबी समझकर उसका समाधान करता है। देश को आज ऐसे खोजी पत्रकारों की आवश्यकता है जो समस्याओं का बारीकी से विश्लेषण कर उसका ठोस समाधान करे। यह काम एक निष्पक्ष और एक निर्भीक पत्रकार ही कर सकता है। उन्होंने आगे कहा कि अंग्रेजों के जमाने में कई ऐसे नियम बनें है कि जो वर्तमान में अप्रासंगिक हो चुके हैं, उन्हें बदलने की आवश्यकता है। समाज की विसंगतियों को उठाना और उसे अपनी कलम के माध्यम से दूर करने का कार्य एक पत्रकार ही कर सकता है। पत्रकार के ऊपर समाज का बहुत बड़ा दायित्व है और यह जिम्मेदारीभरा पेशा है।

इंदौर प्रेस क्लब अध्यक्ष अरविंद तिवारी ने स्वागत उद्बोधन देते हुए कहा कि प्रेस क्लब और विश्व संवाद केंद्र मिलकर के पिछले चार वर्षों से यह आयोजन कर रहे हैं। इस आयोजन से जो निष्कर्ष निकलेगा वह देश के लिए कल्याणकारी सिद्ध होगा। इस तरह के आयोजन भविष्य में भी सतत किए जाएंगे। विश्व संवाद केंद्र, इंदौर के संयोजक सागर चौकसे ने कहा कि हमारी संस्था पत्रकारों के कल्याण के लिए कार्य करती है। हमारा काम नारद की छवि को सही रूप में प्रस्तुत करना है। नारद जी प्रामाणिकता के साथ बोलते थे और उन्होंने लोक कल्याण के लिए ही कार्य किया। श्री चौकसे ने आगे कहा कि आज कुछ टीवी चैनल सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे संदेशों को ही खबरों के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं। इस कारण सत्यता छिप जाती है।

शहर के पांच वरिष्ठ पत्रकारों सर्वश्री शक्तिसिंह परमार, डॉ. जितेन्द्र व्यास, प्रदीप जोशी अभिलाष शुक्ला और फोटो जर्नलिस्ट राजू पंवार को श्रीफल, प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित भी किया गया। बालिका तान्या ने एकल गीत – मैं रहूं या न रहूं, भारत ये रहना चाहिए, की प्रस्तुति दी। अतिथि स्वागत शैलेन्द्र शर्मा, संजय त्रिपाठी, आलोक शर्मा, राजेंद्र कोपरगांवकर, विशाल पंवार एवं कृष्णदास राठी ने किया। कार्यक्रम का संचालन मंजूषा जौहरी ने किया। आभार विशाल सनोटिया ने माना। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक एवं मीडियाकर्मी उपस्थित थे। अंत में शहर के दिवंगत पत्रकारों को दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

भवदीय

(सागर चौकसे)

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