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इंदौर में साहित्य की अलख जगा रहे हैं जितेंद्र चौहान | Jindendra Chauhan is awakening the literature of Indore

Posted on: 09 Apr 2019 15:01 by Mohit Devkar
इंदौर में साहित्य की अलख जगा रहे हैं जितेंद्र चौहान | Jindendra Chauhan is awakening the literature of Indore

अर्जुन राठौर

इंदौर में साहित्य की अलख जगाने में जितेंद्र चौहान नामक शख्स का एक अलग ही योगदान है ,यह योगदान इस अर्थ में है कि वे पिछले 9 सालों से साहित्य गुंजन नामक साहित्यिक पत्रिका का संपादन कर रहे हैं जो सतत बिना किसी सरकारी सहयोग के नियमित रूप से प्रकाशित हो रही है और इस पत्रिका के माध्यम से उन्होंने इंदौर ही नहीं मध्यप्रदेश अपितु पूरे देश के साहित्यकारों को मंच प्रदान किया है । लंबे अरसे तक इंदौर के दैनिक अखबार नईदुनिया में अपनी सेवाएं देने के बाद जितेन्द्र चौहान ने साहित्यिक पत्रकारिता और पुस्तक प्रकाशन को अपने जीवन का ध्येय बना लिया । यह आश्चर्यजनक है कि एक व्यक्ति के प्रयासों से ही उन्होंने पार्वती प्रकाशन की नींव डाली और अभी तक 170 से अधिक पुस्तकों का प्रकाशन कर दिया । इंदौर के लिए निश्चित रूप से बेहद गौरव की बात है कि 170 पुस्तकें प्रकाशित करने वाला शख्स इंदौर में मौजूद है । पुस्तक प्रेमी जितेंद्र चौहान चाहते हैं कि इलेक्ट्रॉनिक क्रांति के इस युग में पुस्तकें पढ़ी जाए और यही वजह है कि वे वर्ष 2014 से लगातार इंदौर में और उज्जैन में अपनी पुस्तक प्रदर्शनी लगाते रहे हैं ,पहले नेशनल बुक ट्रस्ट के साथ लगाते थे उसके पश्चात मई 2012 से स्वतंत्र रूप से उन्होंने इंदौर के रीगल चौराहे पर स्थित प्रीतमलाल दुआ सभाग्रह में पुस्तक प्रदर्शनी लगाना आरंभ कर दी । उनकी पुस्तक प्रदर्शनी में हिंदुस्तान भर के तमाम बड़े लेखको की पुस्तकें बड़ी आसानी से उपलब्ध हो जाती है इनमें गुलजार दिलीप कुमार की आत्मकथा शिवाजी सामन्त डॉ शरद पगारे राहत इंदौरी प्रेमचंद शरद जोशी श्रीलाल शुक्ल विमल मित्र महुआ माजी नासिरा शर्मा, मेकिंग ऑफ कालीचाट , रॉबिन शर्मा गुरुनाथ नाईक की कैबरे डांसर , निदा फाजली, शहरयार, खुशवंत सिंह डॉ कुमार विश्वास , नागार्जुन ओशो के साथ ही इंदौर के लेखक डॉ शरद पगारे अभय छजलानी राहत इंदौरी जवाहर चौधरी अर्जुन राठौर सहित तमाम लेखकों की पुस्तकें यहां पर उपलब्ध हैं । मूलतः जितेंद्र चौहान कवि भी है उनकी कई कविताएं देशभर के अखबारों और पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं । भोपाल दूरदर्शन पर भी वे कविता पाठ कर चुके हैं और कविताओं के पांच कविता संग्रह भी प्रकाशित हुए हैं । वे शहर के जाने-माने कवि हैं और निहायत स्वाभिमान के साथ जीने वाले जितेंद्र चौहान अपनी जिंदगी में किसी भी प्रकार का कोई गलत समझौता नहीं करते हैं , वे बेहद मुंहफट हैं लेकिन दिल के साफ हैं यदि आप ऐसे शख्स से मिलना चाहे तो उनकी पुस्तक प्रदर्शनी दिनांक 4 मई से प्रारंभ हो चुकी है दुआ सभाग्रह में जो लगभग 1 सप्ताह तक चलेगी आप यहां आकर उनसे भी मिल सकते हैं और उन के माध्यम से हजारों पुस्तकें भी आपको देखने को मिल सकती है ।

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