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जयाप्रदाः तीसरी बार सांसदी के लिए चौथी पार्टी से चौथा चुनाव | Jaya Prada for the third time for parliamentary elections from fourth party

Posted on: 10 Apr 2019 15:09 by shivani Rathore
जयाप्रदाः तीसरी बार सांसदी के लिए चौथी पार्टी से चौथा चुनाव | Jaya Prada for the third time for parliamentary elections from fourth party

अभी तक तो फिल्मी दुनिया के सितारे दक्षिण भारत से हिंदी भाषी इलाकों में आते रहे, लेकिन जयाप्रदा(jaya prada) कदाचित ऐसी पहली मिसाल है जो बतौर राजनेता दक्षिण से उत्तर में पहुंची है। दो बार उत्तर प्रदेश के रामपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद निर्वाचित हो चुकी हैं और तीसरी बार फिर मैदान संभाल लिया है। कभी आंध्रप्रदेश के फिल्मी सितारे व दिग्गज राजनेता एनटी रामराव के साथ टीडीपी से राजनीतिक पारी का आगाज करने वाली जयाप्रदा चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी में भी रह चुकी हैं। फिर दामन थामा समाजवादी पार्टी का। प्रेरक बने समाजवादी दिग्गज और बॉलीवुड(bollywod) के साथ राजनीति के मैदान में समान दखल रखने वाले अमरसिंह।

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समाजवादी पार्टी(SP) में बिखराव और अखिलेश यादव द्वारा नकारे जाने के बाद अमरसिंह इस स्थिति में नहीं थे कि जयाप्रदा को टिकट दिला सकें, लिहाजा भाजपा से टिकट दिला दिया। वैसे 2014 की मोदी लहर में उन्होंने राष्ट्रीय लोकदल के बैनर तले बिजनौर से चुनाव लड़ा था और करारी हार का सामना किया था। अब फिर रामपुर के सियासी मैदान में जयाप्रदा का मुकाबला हो रहा है आए दिन विवादित बयान देने वाले आजम खान से। इन्हीं आजम खान के विरोध में अमरसिंह ने समाजवादी पार्टी को नमाजवादी पार्टी तक कह डाला था।

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अब यह जयाप्रदा के राजनीतिक कैरियर के साथ अमरसिंह की भी प्रतिष्ठा का सवाल है कि वे वहां से चुनाव जीतें। इस सारे मामले में बड़ा पेंच यह है कि जयाप्रदा को रामपुर के भाजपाई किस तरह स्वीकार पाएंगे और वे उनके लिए काम कैसे कर सकेंगे जिनका दशकों से खुला विरोध करते रहे हों। इसके अलावा इस सीट ने ग्यारह बार लोकसभा में मुस्लिम नुमाइंदों को भेजा है, जिनमें स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मौलाना अबुल कलाम आजाद (1957) से लेकर भाजपा के दिग्गज मुख्तार अब्बास नकवी (1998) शुमार हैं।

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जाहिर है यह सीट अल्पसंख्य बहुल है। सपा-बसपा गठबंधन, कांग्रेस का अलग से चुनाव लड़ना और समाजवादी पार्टी का आंतरिक बिखराव भी चुनाव के नतीजों को प्रभावित करेगा। इसके अलावा समाजवादियों के बीच अमरसिंह का अपना नेटवर्क भी असर डाले बगैर नहीं रहेगा। कांग्रेस ने भी इस बार यहां से नूर बानो का टिकट काटकर पूर्व विधायक संजय कपूर को टिकट दिया है।

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