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जन्माष्टमी 2018: जानिए कैसे करे जन्माष्टमी का व्रत-पूजन विधि | Janmashtami Vrat Vidhi

Posted on: 03 Sep 2018 10:05 by shilpa
जन्माष्टमी 2018: जानिए कैसे करे जन्माष्टमी का व्रत-पूजन विधि | Janmashtami Vrat Vidhi

Vrat and Poojan Vidhi on Janmashtami

इस साल श्रीकृष्ण जन्माष्टमी Janmashtami 3 सितंबर 2018 को पड़ रही है. भाद्रपद अष्टमी को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाती है. इस दिन को भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का दिन माना जाता है. यह त्यौहार हिंदू त्यौहारों में खास है.हालांकि कुछ जगहों पर इसे मनाने की तारीख को लेकर असमंजस है. कुछ जगह कहा जा रहा है कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 2 सितंबर को है. लेकिन अभी इसे आने में ठीक एक हफ्ता है, तब तक ये असमंजस दूर हो जाएगा. जानिए जन्माष्टमी की व्रत विधि | Vrat Vidhi और कैसे करना है व्रत-पूजन(Vrat and Poojan).

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  Shri Krishna Janmashtami Vrat-Pooja Method – श्रीकृष्ण जन्माष्टमी  का व्रत-पूजन विधि- 

  • उपवास की पूर्व रात्रि को हल्का भोजन करें और ब्रह्मचर्य का पालन करें.
  • उपवास के दिन प्रातःकाल स्नानादि नित्यकर्मों से निवृत्त हो जाएं.
  • पश्चात सूर्य, सोम, यम, काल, संधि, भूत, पवन, दिक्‌पति, भूमि,आकाश, खेचर, अमर और ब्रह्मादि को नमस्कार कर पूर्व या उत्तर मुख बैठें.
  • जल, फल, कुश और गंध लेकर संकल्प करें.
  • अब मध्याह्न के समय काले तिलों के जल से स्नान कर देवकीजी के लिए ‘सूतिकागृह’ नियत करें.
  • तत्पश्चात भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति या चित्र स्थापित करें.
  • मूर्ति में बालक श्रीकृष्ण को स्तनपान कराती हुई देवकी हों और लक्ष्मीजी उनके चरण स्पर्श किए हों अथवा ऐसे भाव हो.
  • विधि-विधान से पूजन करें. इस मंत्र से पुष्पांजलि अर्पण करें-
    प्रणमे देव जननी त्वया जातस्तु वामनः.
     वसुदेवात तथा कृष्णो नमस्तुभ्यं नमो नमः.
     सुपुत्रार्घ्यं प्रदत्तं में गृहाणेमं नमोऽस्तुते.’

अंत में प्रसाद वितरण कर भजन-कीर्तन करते हुए रतजगा करें | In the end, offer Prasad and recite Bhajan-kirtan

  • व्रत के दिन मध्याह्न में स्नानकर माता देवकी के लिए सूतिका गृहबनाएं. उसे फूलों से सजाएं. इस सूतिका गृह में बाल गोपाल समेत      माता देवकी की मूर्ति स्थापित करें.
  • सुयोग्य पंडित की सहायता से विभिन्न मंत्रों द्वारा माता देवकी,बाल गोपाल कृष्ण, नन्दबाबा, यशोदा माता, देवी लक्ष्मी आदि की   पूजा करनी चाहिए.इसके बाद आधी रात को गुड़ और घी से वसोर्धारा की आहुति देकर षष्ठीदेवी की पूजा करनी चाहिए.
  • नवमी के दिन माता भगवती की पूजा कर ब्राह्मणों को दक्षिणा देनी
    चाहिए और व्रत का पारण करना चाहिए.
  • ऐसा करने से मनुष्य के सातों जन्मों का पाप खत्म होता है और वह वैकुण्ठ लोक में स्थान पाता है.

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