आध्यात्मिक क्रांति के सूत्रधार थे तरुण सागर जी महाराज, अर्जुन राठौर की कलम से

0
19

जैन मुनि तरुण सागर जी महाराज अब हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनकी बातें जैन समाज ही नहीं संपूर्ण मनुष्य जगत में हमेशा गूंजती रहेगी।पिछले तीन दशक से उन्होंने अपने क्रांतिकारी विचारों से भारतीय समाज जिस तरह से जागृत किया था वह अनूठी मिसाल है वे जैन समाज ही नहीं समूचे भारतीय समाज के संत बन चुके थे ।

उन के कड़वे प्रवचन पुस्तक सर्वाधिक बिक्री वाली पुस्तक थी जिसके लिए अनेक शहरों में स्टाल खुल गए थे कड़वे प्रवचन पुस्तक की बिक्री बहुत अधिक होती थी। उनका साहित्य घर घर पहुंच चुका था इंदौर में जब उनकी प्रवचन होते थे तब लाखों की संख्या में लोग एकत्रित होते थे तरुण सागर जी जीवन से जुड़ी तमाम बातों को लेकर बेहद मुखर और बेबाक तरीके से बोलते थे। उनके विचार हमेशा याद आएंगे।

अर्जुन राठौर

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here