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एक नेता कहीं खो गया है, कहीं वो आदमी तो नहीं हो गया | Jain institution ‘Jeeto Indore Chapters’ organized a poet gathering at the ‘Brilliant Convention Center’

Posted on: 12 May 2019 15:54 by Surbhi Bhawsar
एक नेता कहीं खो गया है, कहीं वो आदमी तो नहीं हो गया | Jain institution ‘Jeeto Indore Chapters’ organized a poet gathering at the ‘Brilliant Convention Center’

इंदौर: जैन संस्था ‘जीतो इंदौर चैप्टर’ ने ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में कवि सम्मलेन का आयोजन किया। इसमें कवि अरूण जैमिनी हरियाणा, अनामिका अंबर मेरठ और सुभाष काबरा मुंबई ने काव्य पाठ कर एक से बढ़कर एक प्रस्तुति दी। कवि सम्मलेन की शुरूआत नवकार मंत्र और मां सरस्वती की वंदना के साथ की गई। कार्यक्रम की प्रारंभ में पंकज संघवी के भतीजे प्रतीक संघवी ने माइक थामा और उन्होंने उपस्थित श्रोताओं से कहा कि व्यक्ति, परिवार और समाज मेरे काका के दरवाजे से कभी कोई खाली हाथ नहीं लौटा है। एक बार मौका दीजिए, कोई भी काम होगा तो दिल्ली से करा लाएंगैं मेयर का चुनाव लड़े मगर हार गए।

इसके बाद अगले दिन फिर घर आए लोगों को निराश नहीं किया। उन्होंने कहा कि मैं शंकर और संघवी की बात नहीं कर रहा हूं। हम भरत युग में है, इसलिए अच्छे लोगों को ध्यान रखें। इसके बाद कवि सुभाष काबरा ने मंच संभाला। उन्होंने कहा कि इस मंच पर मोदी और राहुल की कोई बात नहीं होगी, फिर गुदगुदाया कि ‘ एक नेता कहीं खो गया है, कहीं वो आदमी तो नहीं हो गया है।‘ दो कौड़ी के नेताओं का जिक्र करके समय क्यों खराब करें, जो नेता आपके चरण छूने आते हैं, पांच साल तक उनके चरण देखने को तरस जाओेगे।

इसके बाद अनामिका अंबर ने अपनी प्रस्तुति से खूब तालियां बटोरी। अंबर ने गूगल कालीन युका जिक्र करते हुए कहा कि ‘ कभी दरिया तो कभी समंदर जाग उठता है, मिले सम्मान तो पत्थर भी जाग उठता है‘ उसके बाद एक घंटे तक शहीदों को शहादत से लेकर धर्म की गाथा तक वा ेले गई और जैन धर्म की गाथा तक वो ले गई और जैन धर्म की जय हो बेहतरीन गीत सुनाया। उन्होंने ‘ मैं तेरे नाम हो जाडं, तू मेरे नाम हो जाए, मैं तेरा दाम हो जाडं, तू मेरा दाम हो जाए, न राधा सा न मीरा सा विरह मंजूर है, मैं रूक्मिणी बन जाउं, तू मेरा श्याम हो जाएं। उन्होंने सुनाया कि ‘ खुशबू चमन चूम लेती है, हसरत तिरंगे को चूम लेती है, सिपाही जब निकलता है वतन पर जान देने को, वतन की धूल उड़कर बदन को चूम लेती है। आखिर में अरूण जैमिनी ने हरियाणवी बोली में श्रोताओं को खूब गुदगुदाया।

 

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