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नई दिल्ली: ईद के ख़ास मौके को दुनियाभर में मनाया जा रहा है। एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर भाईचारे का संदेश दिया जा रहा है। वही ISIS के चंगुल से आजाद हुए ईराक में भी लोगों ने शांति का संकल्प लेते हुए ईद पर चली आ रही सालों की परंपरा को इस ईद पर तोड़ दिया है। दरअसल, ईद के दिन ईराक में बच्चे पटाखे और खिलौने वाली बंदूक के साथ खेलते हैं और अपनी बहनों और दादा-दादी को उससे डराते हैं। लेकिन इस बार इराकियों ने इस परंपरा को न मनाने का फैसला लिया है। यहां लोगों का कहना है कि हथियारों ने सबकुछ बर्बाद कर दिया है, अब हम शांति चाहते है। पहली बार, 50 वर्षीय विधवा उम्म बर्किस ने अपने चार बच्चों के लिए प्लास्टिक की बंदूकें खरीदने से इंकार कर दिया। उनका कहना है कि हम चाहते है कि हमारे बच्चे ईद को खुशियों के साथ मनाए ना कि बंदूक के साथ।गौरतलब है कि ISIS ने ईराक में कब्जा कर जबरदस्त हिंसा फैलाई थी। इसके चंगुल से आजाद होने के बाद अब वहां के लोगो का कहना है कि हल हर उस चीज से नफरत करते है, जो हमे हिंसा की याद दिलाती है। ईद का त्यौहार बंदूक के साथ मनाना जरुरी नहीं है, हम इसे खुशियों के साथ मनाना चाहते है।बता दे कि तीन साल के जिहादियों के शासन के दौरान प्राथमिक विद्यालय बच्चों से गणित की पढ़ाई में गोलियों और ग्रेनेड की गिनती कराई जाती थी, वहीं युवाओं को फ्रंटलाइन युद्ध के लिए प्रशिक्षित किया जाता था।

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