देशद्रोहियों के खिलाफ सख्त मोदी सरकार, देशद्रोह का कानून नहीं होगा ख़त्म

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narendra modi

नई दिल्ली: केंद्र की मोदी सरकार ने देशद्रोह के कानून को लेकर अपना रुख साफ़ क्र दिया है। मोदी सरकार भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) कानून के तहत देशद्रोह के कानून को खत्म नहीं करेगी। गृह मंत्रालय ने राज्यसभा में इस बात की जानकारी दी है। मंत्रालय ने राज्यसभा में बताया कि देशद्रोही, अलगाववादी और आतंकवादी तत्वों से निपटने के लिए इस कानून का रहना जरुरी है।

गृह मंत्रालय ने लिखित बयान जारी कर राज्यसभा में कहा कि देशद्रोह के कानून पर सरकार अपना स्टैंड बरक़रार रखेगी। जब उनसे पूछा गया कि क्या सरकार ब्रिटिश काल से चले आ रहे आईपीसी के सेक्शन 124ए को हटाने की कोशिश कर रही है तो गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा, ”देशद्रोह से जुड़े कानून को खत्म करने का कोई प्रावधान नहीं है। राष्ट्र विरोधी, आतंकियों और पृथकतावादियों से निपटने के लिए इस कानून का होना जरूरी है।”

विपक्ष ने लगाया था दुरूपयोग का आरोप

देशद्रोह के खिलाफ कानून को लेकर विपक्ष ने सरकार पर इसके दुरुपयोग का आरोप लगाया था। विपक्ष का कहना था कि अंग्रेजों के समय के इस कानून का सरकारें दुरूपयोग कर रही है और अब इसे खत्‍म करने का समय आ गया है। 2019 के लोकसभा चुनाव के घोषणापत्र में कांग्रेस ने इस कानून को ख़त्म करने की बात कही थी। हालांकि कांग्रेस को अपनी इस घोषणा का काफी बड़ा राजनीतिक नुकसान भी झेलना पड़ा था।

ये है कानून

आईपीसी की धारा 124A में देशद्रोह की दी हुई परिभाषा के मुताबिक, अगर कोई भी शख्स सरकार-विरोधी सामग्री लिखता या बोलता है या फिर ऐसी सामग्री का समर्थन करता है, या राष्ट्रीय चिन्हों का अपमान करने के साथ संविधान को नीचा दिखाने की कोशिश करता है, तो उसे आजीवन कारावास या तीन साल की सजा हो सकती है।

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