शख्सियत

इंदौर.  मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे गोपालदास अग्रवाल ने अपने जीवन में संघर्ष करते हुए सफलता के नए मुकाम हांसिल किए। उन्होंने अपने छात्र जीवन में आंदोलन की शुरुआत कर दी थी। जीवन में कई उतार-चढ़ाव देखने के बाद मौजूदा समय में म.प्र. अनाज दलहन तिलहन व्यापारी महासंघ के अध्यक्ष एवं भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं। आपने संगठन के बैनर तले व्यापारियों की नोटबंदी, जीएसटी, कृषि उपज मंडी समिति और किसानों को उपज का मंडी में कैश भुगतान की समस्या सहित अन्य मुद्दों पर समय-समय पर प्रादेशिक आंदोलन किए और व्यापार जगत की समस्याओं का निदान करवाया। इंदौर अनाज, दलहन, तिलहन व्यापारी संघ के अध्यक्ष रहते हुए आपने पारमार्थिक ट्रस्ट के माध्यम से कई दीनदुखियों की सेवा की, संस्था की ओर से संचालित वृद्धाश्रम देवगुराडिय़ा स्थित संस्था के स्कूल संचालन में भी बखूबी भूमिका निभाई। आपने मंडी व्यापारियों के लिए व्यापारिक औद्योगिक सहकारी बैंक लि. की स्थापना की। अग्रवाल व्यापार के साथ-साथ राजनीति, शिक्षा, बैंकिंग और सहकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं और अच्छी पकड़ रखते हैं। घमासानडॉटकॉम से हुई बातचीत के अंश…..

812864ff-9bc4-4b4a-9588-7893279999a8प्रारंभिक संघर्ष
राजमोहल्ला स्थित परसरामपुरिया स्कूल के प्राचार्य स्व. ओमप्रकाश रावलजी, जो कि बाद में प्रदेश के शिक्षा मंत्रई रहे, उनको स्कूल प्रबंधन ने किसी कारण से नौकरी से निकाल दिया था। तब अग्रवाल ने तीन माह तक स्कूल प्रबंधन के खिलाफ आंदोलन किया और अंतत: स्कूल प्रबंधन को रावल सरकार को वापस सेवा में लेना पड़ा।

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जब कलेक्टर को जड़ दिया चांटा
युवावस्था के दौरान समाजवादी नेता मामा बालेश्वरदयाल, शरद यादव, रघु ठाकुर और जार्ज के संपर्क में आए और समाजवादी यूजन सभा के प्रदेश पदाधिकारी रहे। समाजवादी विचारधारा से इतने प्रभावित रहे कि 1971 में अपने साथियों की गिरफ्तारी के खिलाफ जिलाधीश को ज्ञापन देने गए तो तत्कालीन कलेक्टर ने ज्ञापन लेने से इनकार कर दिया तो अग्रवाल ने आवेश में आकर उनको चांटा रसीद कर दिया, यह केस बीस साल चला, अंतत: वे इस केस में बरी हुए।

आपातकाल और शादी
अग्रवाल बताते हैं कि इंदिरा गांधी ने २५ जून १९७५ को देश में आपतकाल लगाया था, इसी दिन मेरी शादी थी, पुलिस मुझे पकडऩे के लिए घूम रही थी। पुलिस से बचकर जैसे-तैसे पत्नी को घर छोड़ा और एक माह तक भूमिगत रहे। बाद में गिरफ्तारी हुई और चार माह तक जेल में रहे।

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उपलब्धियां…
-मंडी समिति द्वारा व्यापारियों से लाखों रुपए गारंटी ली जाती थी, उसे कम करवाकर पांच हजार रुपए करवाई।
-१९७७ में निकायकर के विरोध में प्रदेश बंद करवाया और अंतत: सरकार ने निकाय कर वापस लिया।
-इंदौर अनाज दलहन तिलहन व्यापारी संघ में मंत्री व अध्यक्ष रहते हुए संस्था के स्कूल और वृद्धाश्रम शुरू करवाने में महत्वपूर्ण भूमिका।
-व्यापारिक औद्योगिक सहकारी बैंक की स्थापना। संयोगितागंज ब्रांच में सफल संचालन के बाद लगातार वर्षों तक शेयर होल्डर्स को २५ प्रतिशत लाभांश दिलाया।
-कालांतर में बैंक का विस्तार करते हुए मल्हारगंज ब्रांच शुरू करवाई।

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