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खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय और मुकाबला ठेठ गांवों में

Posted on: 06 Apr 2019 18:17 by shivani Rathore
खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय और मुकाबला ठेठ गांवों में

दोनों ही अपने-अपने फन के माहिर हैं। एक ओलिंपियन होकर भारत सरकार में राज्य मंत्री हो गए तो दूसरीं राष्ट्रमंडल खेलों में पदक जीतकर विधायक बन चुकी हैं। इस बार दोनों लोकसभा में जाने के लिए एक ही सीट पर आमने-सामने है। सीट है जयपुर ग्रामीण और मुकाबला है भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ और कांग्रेस के टिकट पर मैदान संभाल रही कृष्णा पूनिया के बीच। राठोड़ इसी सीट से सांसद और केंद्रीय मंत्री हैं तो कृष्णा पुनिया पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ रही हैं। वे फिलवक्त सादुलपुर से विधायक हैं। कर्कश राजनीतिके दौर में चुनाव अभियान आगे बढ़ने पर क्या होगा यह तो पता नहीं, लेकिन फिलवक्त तो सद्भावना कयम है।

कृष्णा कहती हैं हम एथलीट हैं और यह लड़ाई विचारधाराओं की है। पिछला लोकसभा चुनाव मोदी के नाम पर लड़ा गया था, इसलिए उसके नतीजों की आज कोई प्रासंगिकता नहीं है। उस चुनाव में झूठे वादे किए गए और बाद का समय भी झुमलेबाजी में ही निकल गया। मेरा नाता साधारण किसान परिवार से है और  आम आदमी से जुडे मुद्दे मेरी प्राथमिकाओं में शुमार हैं। किसानों को अपने उत्पाद का सही मूल्य और युवाओं को रोजगार चाहिए। मैं यह चुनाव उन्हीं वास्तविक मुद्दों पर लडूंगी जो आम आदमी से जुडे होंगे।

जयपुर ग्रामीण लोकसभा सीट का ज्यादातर इलाका  जयपुर-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग के आसपास पड़ता है। जहां तक राठौड़ का सवाल है सोलहवीं  लोकसभा के चुनाव में उन्होंने ३.३३ लाख मतों से विजयी परचम लहराया था। वे मोदी सरकार की उपलब्धियों के साथ साथ अंतरिक्ष में भारत की बेहतर क्षमता का प्रदर्शन को चुनावी मुद्दा बनाने में जुटे हैं। वे कहते हैं मैं अपने क्षेत्र के लोगों से सतत संपर्क में हूं। पांचों साल ग्राम पंचायत, वार्ड स्तर पर विकास के के लिए बगैर भेदभाव के फंड आवंटित किया।

जीवन का आधा शतक पूरा कर रहे राठौड़ ने एथेंस ओलिंपिक (२००४) में डबल ट्रैप शूटिंग में सिल्वर मेडल जीता था। सेना में कर्नल रह चुके राठौड स्वेच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर २०१४ में भाजपा पार्टी से जुड़े। वहीं पदमश्री से सम्मानित कृष्णा पूनिया ने लंदन ओलिंपिक (२०१२) की डिस्कस थ्रो इवेंट में छठा नंबर पाया था। वहीं  दिल्ली राष्ट्रमंडल खेल (२०१०) में स्वर्ण पदक जीता था। वे भी तीन ओलंपिक में भाग ले चुकी हैं। २०१३ में राजनीति में आने के बाद वे विधानसभा का पहला चुनाव हार गई थीं। इस बार जीत दर्ज कराई।

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