हिस्ट्री आफ दशनामी नागा सन्यासी के रोचक रहस्य

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यह ढांचा कितना पुराना है इस संबंध में पर्याप्त गवेष्णा नहीं हुई है। सर जदुनाथ सरकार ने ‘ए हिस्ट्री ऑफ दशनामी नागा संन्यासी’ में कुछ शोध निष्कर्ष दिए हैं लेकिन वे पर्याप्त नहीं हैं। अखाड़ों के पास काफी कुछ रिकॉर्ड हो सकते हैं जैसे पंचायती महानिर्वाणी अखाड़ा के संस्थान पर जागीर में 1200 हस्त लिखित ग्रंथों का संग्रह है। इनमें कई चार सौ साल से पहले लिखे गए हैं। दूसरे अखाड़ों के पास भी पर्याप्त संग्रह है, लेकिन उनके पदाधिकारी उन ग्रंथों को हवा नहीं लगने देते। महंत लालपुरी ने कुछ मढिय़ों की महंत परंपरा को ढूंढऩे और निश्चित करने का काम शुरू किया था।

सभी अखाड़े, मठ, दावे और धूनि अपने काम में स्वतंत्र थे। किसी को किसी से शासित नहीं होना पड़ता था। पर एक नैतिक अनुशासन जरूर था। अखाड़ों में तालमेल बनाए रखने के लिए एक विद्वत्सभा भी होती थी। आजकल उसे अखाड़ा परिषद कहा जाता है। कोई कठिन परिस्थिति आने पर इस सभा के सदस्य इसे होते और मिल बैठकर मसला तय कर लेते थे। मसला हल हो जाने के बाद सभासद बिखर जाते। विद्वत्सभा का स्वरूप ऐसा नहीं था कि लोग उसमें शामिल होने के लिए नामांकन भरें और चुनाव लड़ें, ठेठ पंचायती शैली में व्यवस्था चलती थी।

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