अमिताभ बच्चन को लेकर पत्रकार मनोज खांडेकर की एक दिलचस्प टिप्पणी

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पिछले काफी महीनों से आपके बारे में लिखने की सोच रहा था… वक्त नहीं मिला या यूं कहा जाए कि बेवजह की ओढ़ी हुई व्यस्तता की वजह से लिख नहीं पाया… ख्याल तो बार-बार आता रहा, लेकिन थोड़ा लापरवाह होकर लिखा नहीं…।

खैर… बात 2011 की होगी… जब ट्विटर नाम की चिड़िया ने भारत की डिजिटल धरती पर चहकना शुरू किया था…देश का मिजाज उस वक्त कुछ अलग ही था… क्रिकेट का वो दौर सचिन तेंदुलकर का दौर था… भारत में वर्ल्ड कप खेला जा रहा था… 28 साल बाद उम्मीद थी कि वर्ल्ड कप जीतने का सपना पूरा होगा…।

उस वक्त देश में सचिन से ज्यादा किसी शख्स की फैन फॉलोइंग नहीं थी… माफ कीजिएगा आपकी भी नहीं… तब किसी अख़बार में ख़बर छपी थी या किसी ने आपसे सवाल पूछा था कि ट्विटर पर आपके फॉलोवर सचिन की तुलना में काफी कम है… तब आप ने इस तरह की तुलना को बेतुका बताया था… और शायद ये भी कहा था कि ऐसी तुलना ठीक नहीं…।

आप काफी नाराज हो गए थे… सचिन के फैन होने की वजह से मुझे आपका रिएक्शन पसंद नहीं आया था… खैर, बात काफी पीछे छूट गई… अब सात साल बाद आप ट्विटर पर भी ‘शहंशाह’ है… सचिन के के 25 मिलियन फॉलोवर हैं… और आपके 34 मिलियन से ज्यादा हैं… बॉलीवुड के सबसे बड़े सुपरस्टार से क्रिकेट का भगवान काफी पीछे रह गया…।

यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि ट्विटर पर ‘आप जहां खड़े होते हैं, लाइन वहां से ही शुरू होती है.’ तब भी ‘शहंशाह’ को नंबर की याद आ रही है… मर्द में आपने बड़ी दमदारी से कहा था… मर्द को दर्द नहीं होता… लेकिन ट्विटर को लेकर ये कैसा दर्द…।

भले ही इस बार तुलना सचिन या किसी से नहीं की जा रही है… फिर भी अमिताभ जी ये कैसी होड़… “अरे यार ट्विटर जी… यार अब तो हमारे नंबर बढ़ा दो… कब से इतना कुछ डाल रहे हैं. कुछ और करना हो नंबर बढ़ाने के लिए तो बोलो.” मुझ जैसे आपकी अदाकारी के फैन को छोड़िए, जो आपका नापंसद, शायद ही कोई होगा… करता होगा… वो भी 43 साल पहले रिलीज हुई है दीवार फिल्म के इस संवाद को भूल नहीं सकता… जिसमें आप कहते हों… “मैं आज भी फेंके हुए पैसे नहीं उठाता”… फिर ये ट्विटर पर यूजर के लिए ऐसी जिद क्यों… क्यों ‘फेंके’ हुए यूजर चाहिए…।

आपके चाहनेवालों को बुरा लगेगा… लेकिन ये भी सच है कि पिछली बार आपने ट्विटर छोड़ने की धमकी दी थी… तब आपके ट्विटर हैंडल को प्रमोट किया गया था… ये मैं केवल कहने के लिए नहीं बोल रहा हूं… बकायदा स्क्रीन शॉट है मेरे पास… मैं कतई यह नहीं कह रहा हूं कि… आपकी धमकी के बाद ट्विटर ने ऐसे किया होगा… लेकिन ट्विटर पर प्रमोट ‘ट्वीट’ का मतलब पैसे के जरिए फॉलोवर और रिच बढ़ाना होता है… बस मेरा इतना कहना है कि जिस शख्स के एक संवाद से कई पीढ़ी ‘फेंके हुए पैसे’ को सेल्फ रिस्पेक्ट से जोड़कर देखती है और प्रेरित होती है… जिसके न जाने कितने डायलॉग से लाखों लोग ठसक के साथ अपनी बात रखते हैं … वो ‘फेंके’ हुए ट्विटर फॉलोवर हासिल करें… उसके चाहनेवालों को कतई अच्छा नहीं लगेगा…।

आपने तो शराबी का में बड़ी दमदारी से कहा था, “गोवर्धन सेठ समंदर में तैरने वाले कुओं और तालाबों में डुबकी नहीं लगाया करते…” आप तो ट्विटर पर सर्वाधिक फॉलो किए जाने वाले तीसरे भारतीय हैं… फॉलोवर के समंदर में तैरने वाला क्यों कुछ फॉलोवर के लिए तालाब में डुबकी ला रहा है…।

आपकी अदाकारी का पूरी तरह सम्मान करते हुए… अंत में आपके ही डायलॉग से बात खत्म करना चाहूंगा… त्रिशूल का वो संवाद… “आज आपके पास सारी दौलत (34 Millions Followers) है पर आपसे ज्‍यादा गरीब (इस देश में लोग 500 ट्विटर फॉलोअर होने पर भी फख्र महसूस करते हैं) मैंने आज तक किसी को नहीं देखा…।”

मनोज खांडेकर

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