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गजब की हिम्मतवाला प्रेरणादायी विकलांग नौजवान नितेश वडनेरकर | Inspirational young man Nitesh Vadnekar

Posted on: 09 Mar 2019 18:19 by Surbhi Bhawsar
गजब की हिम्मतवाला प्रेरणादायी विकलांग नौजवान नितेश वडनेरकर | Inspirational young man Nitesh Vadnekar

वरिष्ठ लेखक अनिल कुमार धड़वई वाले की रिपोर्ट

कल शाम की बात है। मैं रामबाग के एक मेडिकल शॉप पर दवाई खरीदने गया था। तभी वहां एक युवक मुस्कुराते लेकिन लड़खड़ाते हुए वहां आया। उसने अपने टेढ़े हो चुके एक हाथ से अपने झोले से सांध्यकालीन अखबार निकाला और दुकानदार को दिया। दुकानदार ने बड़े प्रेम से उसे चाय पीने के लिये शॉप के अंदर बिठाया। और फिर उनकी गपशप शुरू हो गयी। इसी दरमियां मैंने भी उस विकलांग युवक से बातचीत की। तब पता चला कि बाणगंगा इलाके के वृंदावन कॉलोनी में रहनेवाले उस खुद्दार किस्म के नौजवान का नाम नितेश वडनेरकर है।

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9 वी कक्षा तक पढ़ाई चुके 23 वर्षीय नितेश ने बताया कि वह जन्म से ही पोलियोग्रस्त है। उसका बाया हाथ में दर्द होता रहता है। उसका कोई इलाज नही है। बोलने में भी उसे काफी तकलीफ होती है। साफ बोल नही पाता। उसके परिवार में मां।-पिता और एक बड़ा विवाहित भाई है। पिताजी माधवराव लकवे की बीमारी की वजह से त्रस्त है। मां अलकाताई प्रायः बीमार रहती है।

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परिवार की माली हालत बेहद खस्ता होने से उसने पढ़ाई को छोड़कर उम्र के 13-14 वे साल से,किशोरावस्था से ही अखबार बेचना शुरू कर दिया था।उसकी विल पॉवर बहुत तगड़ी है। उसकी हिम्मत देख संवेदनशील लोगो ने उसका साथ दिया, होंसलाअफजाई की। इनदिनों नितेश सुबह के 300 दैनिक और शाम के 200 अखबार बेचता- बांटता है।जिसके लिये वह सुबह 4 -4^30 बजे उठ जाता है।और शारीरिक कमजोरी के बावजूद उसे रोजाना 10-12 किलो मीटर चलना पड़ता है।

विशेष उल्लेखनीय और आज के युवाओ के लिये सीखने की बात तो ये है की नितेश अपने बुजुर्ग व बीमार माँ और पिताजी की सेवा करने में कोई कसर नही रखता है। उनकी सेवा में उसे भगवान की भक्ति का आनंद मिलता है।

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