इन छोटे छोटे टोटको से इंद्र देव को कर सकते है प्रसन्न | Indra Dev can be Delighted with these Remedies…

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चिलचिलाती गर्मी से राहत के लिए तो बारिश ही एक मात्र सहारा है। लेकिन अगर बारिश सही समय पर ना हो तो सुखे के साथ और भी कई समस्या बढ़ने लगती है। कहा जाता है कि यदि इंद्र देव प्रसन्न हो तो बारिश में देरी नहीं होती है। वैसे तो इंद्र को खुश करना इतना मुश्किल भी नहीं होता है। मध्य और उत्तर भारत में सालों से मानसून के लिए टोटके किए जाते है जो काफी सफल भी माने जाते है। आज हम आपको यही बताने जा रहे कि कैसे इंद्र को खुश कर जल्द ही बारिश को लाया जा सकता है।

मानसून लाने के लिए उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कई गांवों में मान्यता है कि अगर महिलाएं रात के समय नग्न होकर खेतों में हल चलाएं तो जल्द ही बारिश होती है। इस टोटके में महिलाएं समूह बनाकर खेत को घेर लेती हैं जिससे कोई यह देख नहीं पाए।

बारिश समय से ना हो तो बेड़ नाम का टोटका सबसे कारगर साबित होता है। विदिशा के एक पठारी कस्बे की मान्यता के मुताबिक गाजे-बाजे के साथ ग्रामीण महिलाएं किसी खेत पर अचानक हमला बोल देती हैं। वो खेत पर काम कर रहे किसान को बंधक बना लेती हैं। किसान को गांव में ला कर दुल्हन की तरह सजाया जाता है और किसान की पैसे देकर विदाई की जाती है। मान्यता है कि ऐसा करने से इंद्र देव जल्द प्रसन्न होते हैऔर मानसून समय पर आता है।

यह टोटका थोड़ा अजीब जरुर लगेगा लेकिन इस टोटके को आजमाने से बारिश आने के आसार बढ़ जाते है। मालवा क्षेत्र में ऐसी मान्यता है कि अच्छी बारिश के लिए जीवित व्यक्ति की शवयात्रा निकाली जाए तो बारिश जल्द ही आ जाती है।

उत्तर प्रदेश, बिहार, ओडिशा और उत्तरपूर्वी राज्यों में अच्छी बारिश के लिए पूरे हिंदू रीति-रिवाजों से मेंढ़क-मेंढ़की की शादी करवाई जाती है। इतना ही नहीं ओडिशा में तो मेंढ़कों का नाच तक करवाया जाता है। इन टोटकों को मानसून के लिए अच्छा माना जाता है।

मध्यप्रदेश के कई गांवों में ऐसा माना जाता है कि शिवलिंग को पूरी तरह से पानी में डूबोकर रखने से अच्छी बारिश होती है और सुखे क्षेत्र में भरपूर पानी आ जाता है।

मध्यप्रदेश के ही खंडवा जिले के बीड़ में गांव में लोग अच्छे मानसून की कामना करते हुए मंदिर के कैंपस में खाली मटके जमीन में गाड़ देते हैं। मानसून को जल्द बुलाने के लिए यह उपाय सबसे बेस्ट माना जाता है।

मध्य प्रदेश के सागर जिले के शिकारपुर गांव में 2002 में सूखे के दौरान जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को ग्रामीणों ने कड़ी धूप में सूखे पेड़ से बांध दिया था। ग्रामीणों की मान्यता थी कि इससे सूखा खत्म होगा। सूखे के दौरान आज भी वहां के लोग यह उपाय करते है।

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