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इंदौर के सांस्कृतिक योद्धा हैं सत्यनारायण व्यास, वरिष्ठ पत्रकार अर्जुन राठौर की टिप्पणी

Posted on: 08 May 2018 09:09 by Ravindra Singh Rana
इंदौर के सांस्कृतिक योद्धा हैं सत्यनारायण व्यास, वरिष्ठ पत्रकार अर्जुन राठौर की टिप्पणी

इंदौर के सांस्कृतिक ,साहित्यिक सामाजिक और रंगमंच से लेकर सिनेमा तक के तमाम कार्यक्रमों के पीछे यदि हमें किसी एक व्यक्ति की भूमिका नजर आती है तो उस व्यक्ति का नाम है सत्यनारायण व्यास। जिन्हें लोग एस एन व्यास के नाम से भी जानते हैं।

सूत्रधार नामक संस्था के माध्यम से व्यास जी अकेले सांस्कृतिक योद्धा के रूप में वर्ष भर में जाने कितने कार्यक्रम कर डालते हैं उनके कार्यक्रमों की फेहरिस्त देखी जाए तो पता चलेगा कि साल भर में उन्होंने रंगकर्म, सिनेमा, साहित्यिक , सांस्कृतिक कार्यक्रम से लेकर अनेक विधाओं में कई अनूठे कार्यक्रम इंदौर शहर में करवाए हैं।

मैं उन्हें सांस्कृतिक योद्धा इस अर्थ में भी कह सकता हूं कि वे सरोज कुमार जी के शब्दों में वन मैन आर्मी है।

सूत्रधार के कार्यक्रमों की एक और विशेषता है ,इन कार्यक्रमों में कोई बड़ी औपचारिकता नहीं होती। न हीं भाषणबाजी में समय नष्ट किया जाता है कार्यक्रम निश्चित समय पर शुरू हो कर निश्चित समय पर समाप्त हो जाते हैं । कार्यक्रमों में स्वागत की औपचारिकता पुस्तक भेंट करके पूरी की जाती है

सूत्रधार नामक संस्था के माध्यम से सत्य नारायण व्यास पूरे साल भर सांस्कृतिक यज्ञ में लगे रहते हैं उनके बारे में कहा जाता है कि उनका समूचा जीवन ही साहित्य और संस्कृति को समर्पित है।

यह सोचना बेहद आश्चर्यजनक लगता है कि पिछले कई वर्षों से इंदौर के सांस्कृतिक मोर्चे पर सुत्रधार नामक संस्था ने जो पहचान बनाई है और इस संस्था के माध्यम से जो उल्लेखनीय कार्यक्रम हुए हैं अगर वे सब ये संस्था नहीं करती तो क्या इंदौर को इतने अच्छे कार्यक्रम किसी अन्य संस्था से मिल पाते। यह निश्चित रूप से एक विचारणीय प्रश्न है।

लेकिन सूत्रधार का जो योगदान है इंदौर के सांस्कृतिक इतिहास को बनाने में उस पर अवश्य विचार किया जाना चाहिए। अपने प्रचार प्रसार से कोसों दूर व्यास जी नए नए कार्यक्रमों की योजना बनाने में लगे रहते हैं उनसे जब भी मुलाकात होती है तो वे अवश्य इस बात का उल्लेख करते हैं कि अगले महीने वे कौन से कार्यक्रम करने जा रहे हैं ।

देखा जाए तो एस एन व्यासजी का सांस्कृतिक कर्म उन तमाम संस्थाओं के बारे में सोचने के लिए बाध्य करता है जो लाखों करोड़ों की संपत्ति और आमदनी होने के बावजूद उसने सार्थक कार्यक्रम इंदौर शहर को नहीं दे पाती । जितने कार्यक्रम व्यासजी बगैर किसी बड़े आर्थिक आधार के दे पाते हैं । यहां पर इस बात को उठाने का उद्देश्य किसी भी संस्था की कार्य क्षमता पर प्रश्नचिंह लगाना नहीं है लेकिन इसके साथ ही व्यास जी के एकल योगदान को भी याद किया जाना चाहिए ।

सूत्रधार की असली ताकत है उनके सदस्य जो इस संस्था को प्रतिवर्ष अपना योगदान देते हैं और यह योगदान स्वैच्छिक है। लोग व्यास जी को ढूंढ ढूंढ कर वर्ष भर की अपनी सदस्यता राशि प्रदान करते हैं। मराठी समाज मे जैसे जयंत भिसे ने सानंद नामक संस्था के माध्यम से एक सांस्कृतिक क्रांति खड़ी की है वैसी ही क्रांति हिंदी में खड़ा करने का श्रेय श्री सत्य नारायण व्यास जी को दिया जा सकता है ।

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