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इंदौर राइटर्स क्लब की बैठक मैं आज पत्रकार शाहिद मिर्जा को याद किया गया

Posted on: 27 May 2018 12:46 by Mohit Devkar
इंदौर राइटर्स क्लब की बैठक  मैं आज पत्रकार शाहिद मिर्जा को याद किया गया

इंदौर राइटर्स क्लब की बैठक का सिलसिला आज भी जारी रहा आज स्वर्गीय पत्रकार श्री शाहिद मिर्जा जी का जन्मदिवस होने से राइटर्स क्लब का कार्यक्रम उन पर केंद्रित रहा. आज के कार्यक्रम में शाहिद जी को याद करते हुए श्री सरोज कुमार ने कहा कि वे राजेंद्र माथुर के बड़े प्रिय थे और नाटक कला तथा साहित्य में उनकी बड़ी रुचि थी उनकी समीक्षाएं बेहद गंभीर होती थी और रंगकर्म पर उनकी पकड़ थी बेहतर नामक एक नाटक संस्था भी शाहिद ने बनाई थी शाहिद की एक और विशेषता थी वह एक जगह रुक नहीं पाते थे उन्होंने मकबूल फिदा हुसैन को इंदौर बुलाया था वह बेहतर पारदर्शी थे और विभिन्न कलाओं में उनकी रुचि थी नईदुनिया ने उन्हें जर्मनी भेजा था राजेंद्र माथुर के निधन के समय इंदौर एयरपोर्ट पर शाहिद भाई अचानक आ गए थे और उन्होंने कहा कि मेरे पिता चले गए हैं. इंदौर में वह बेहद लोकप्रिय थे लेकिन दिल्ली जाकर शाहिद शाहिद नुमा नहीं रहे उन्होंने कविताएं भी लिखी थी शाहिद का अपना एक आकर्षण था.

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पूर्व विधायक श्री अश्विन जोशी ने कहा कि होलकर कॉलेज में हमारी गैंग थी उसमें आदिल कुरैशी और शाहिद मिर्जा आते थे शाहिद भाई ने मुझे उनके नाटकों के टिकट की बिक्री के लिए भी कहा था उनके साथ मेरा बड़ा अच्छा समय गुजरा उस महफिल में कभी कोई गाना गाता था और शाहिद भाई मालवी में बेहद अच्छी बातें किया करते थे, पद्मश्री तथा हिंदी कमेंट्रेटर श्री सुशील दोषी जी ने कहा कि हिंदी में मैं उस जमाने में कमेंट्री करता था और शाहिद मिर्जा उज्जैन में पढ़ते थे उन्होंने मुझे एक कार्यक्रम में वहां बुलाया था उन्होंने मुझे उस समय यह बात कही थी कि एक कलाकार और लेखक का सत्य एक आम आदमी के सत्य से अलग होता है शाहिद बहुत नेक इंसान थे और उनमें सेंस ऑफ ह्यूमर अच्छा था उनमें एक अजीब सी छटपटाहट थी और उनमें असीम संभावनाएं थी शाहिद मूलतः कलाकार थे लेकिन फिर भी वे जो करना चाहते थे संभवता वह कर नहीं पाए. उन्होंने कहा कि किसी दोस्त की मौत पर ऐसा लगता है कि हम भी कहीं-कहीं टुकड़े में मर गए हैं उन्होंने कहा कि मौत पर हम भाषण देते हैं लेकिन हम कभी यह नहीं सोचते कि जीते जी उनके लिए हमने क्या किया.

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कीर्ति राणा ने कहा कि बहती हवा सा था वो. वे बेहद बेफिक्रे इंसान थे मालवी में वे गालियां देते थे और उन्हें अच्छी लगती थी. उन्होंने बेबाक पत्रकारिता की, नईदुनिया भास्कर और पत्रिका में अपनी पहचान बनाई उन्हें खाने के साथ ही लिखने का बहुत शौक था भास्कर में राष्ट्रपति वेंकटरमन की मेरी चर्चा को फ्रंट पेज पर छापा था. वे पूरी तरह से पत्रकारिता को समर्पित थे और राजेंद्र माथुर जी को उन पर बहुत भरोसा था. श्री राजकुमार कुंभज ने कहा कि उन्होंने विभिन्न कलाओं में भ्रमण किया और वे प्रतिबद्धता के साथ काम करते थे वे खबर के महत्व को समझते थे राजेंद्र माथुर की परंपरा उन्होंने आगे बढ़ाया भाषा की संजीदगी शाहिद मे थी शाहिद की मंडली ने कंधे पर बिठाकर मेरा जुलूस निकाला था. बउनमें रचनात्मक बेचैनी थी लेकिन वह जल्दी चले गए. श्री रवींद्र व्यास ने कहा कि फनकार संस्था सबसे अच्छी संस्था थी और यही संस्था मकबूल फिदा हुसैन को इंदौर लाई. उस दौरान शाहिद भाई ने एक्टिंग वर्कशॉप भी लगाई थी उन्होंने एक किस्सा भी सुनाया जिसमें उन्होंने कहा कि मकबूल फिदा हुसैन जब इंदौर आए और फनकार की तरफ से उन्होंने पेंटिंग बनाई तो वे उसे कला महाविद्यालय को समर्पित करना चाहते थे लेकिन शाहिद भाई ने कहा कि इसे फनकार के लिए दीजिए बाद में वह पेंटिंग आदिल भाई के पास रह गई. शाहिद भाई मैं इतनी उदारता थी कि वह अपने साथियों को बड़ा बनाते थे पत्रकारिता का यह गुण अब कहीं लुप्त हो गया है उनमें रचनात्मक आवारगी भी थी वे फोकस करते तो उनकी कई पुस्तकें आती उन्होंने कहा कि वह आत्ममुग्ध इंसान भी थे उन्होंने एक किस्सा सुनाते हुए कहा कि एक बार जब अशोक बाजपेयी के साथ आ रहे थे तो शाहिद भाई ने गालिब के कुछ शेर अशोक बाजपेयी को सुनाएं लेकिन जब अशोक बाजपेयी ने पलट कर उन्हें ग़ालिब के वे शेर सुनाएं जो शाहिद भाई कभी सुने ही नहीं थे.

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श्री अभय वर्मा ने कहा कि भास्कर में वे ट्रेनी थे और उस दौरान उनका मुझे बहुत सहयोग मिला पत्रकारिता की चमक उनमें थी. नउन्होंने मुझे कई मौके दिए और मेरे ऊपर हाथ भी रख दिया था, उनका सहयोग में हमेशा याद रखूंगा शाहिद मिर्जा की बहन तथा पत्रकार रुखसाना मिर्जा ने कहा कि वे अक्सर अपनी मां को चिट्ठी लिखते थे और उसकी भाषा अलग होती थी कभी हिंदी कभी उर्दू। मां को लिखी चिट्ठी का वाचन भी रुखसाना जी ने इस अवसर पर किया और उन्होंने शादी के बाद के किस्से भी बताये राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सेव उनकी दोस्ती थी और वे उनके नजदीक रहते थे लेकिन अशोक गहलोत के कई बार कहने के बावजूद उन्होंने उन्हें अपने घर आमंत्रित नहीं किया वे बड़े लोगों से दूर रहना ही पसंद करते थे. उनके अपने तेवर थे उन्होंने शाहिद मिर्जा की लिखी हुई कविताएं भी सुनाई.

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वेदप्रताप वैदिक जी ने कहा कि शाहिद मिर्जा से मेरा लगातार संपर्क रहा नईदुनिया के बाद में जब जयपुर गए तब भी उनके संपर्क में रहे. शाहिद के पिता जी द्वारा लिखी गई चिट्ठी को वैदिक जी ने बेमिसाल बताया, इस चिट्ठी का वाचन उनकी बहन रुखसाना मिर्जा ने किया. अर्जुन राठौर ने बसंत पोतदार से जुड़ा किस्सा सुनाया. कीर्ति राणा ने अपना आलेख सुनाया सरोज कुमार ने कविताएं सुनाई और तारिक शाहीन अपनी ग़ज़लें सुनाई. वेदप्रताप वैदिक जी ने विभिन्न राजनीतिक मुद्दों पर बातचीत की.

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आज की बैठक में वेदप्रताप वैदिक जी श्री राजकुमार कुंभज श्री सरोज कुमार श्री तारिक शाहीन पद्म श्री सुशील दोषी जी श्री अश्विन जोशी जी श्री सुभाष खंडेलवाल श्री चंद्रशेखर बिरथरे श्री रवींद्र व्यास डॉ सुरेंद्र यादव कीर्ति राणा डॉ स्वरूप बाजपेयी अशोक देवले शशिकांत गुप्ते तारिक शाहीन आलोक वाणी रुखसाना मिर्जा अर्जुन राठौर. प्रद्युम्न पालीवाल वैभव सोनी लोकेश वाणी जीवराज सिंघी जी मनोहर वर्मा अभय नेमा लकी सोनगरा आदि उपस्थित थे

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