पिपलियाहाना तालाब को बचाने के लिए फिर उठी आवाज़ 

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इंदौर के पिपलियाहाना तालाब को लेकर एक बार फिर आवाज उठी है, वर्ष 2016 में भारी जन विरोध के बाद निर्माण कार्य रोका गया था। तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा कहा गया था, कि पिपलियाहाना पर निर्माण कार्य रोका जाता है और जिला न्यायालय परिसर की बिल्डिंग के लिए अनियंत्रित भूमि चयन करने हेतु एक उच्चस्तरीय समिति गठित की जाएगी।

उस समय जन आंदोलन को कुचलने के लिए सरकार की रणनीति आम नागरिकों के साथ सरासर धोखा एवं विश्वासघात क्योंकि दिनांक 3 जनवरी 2019 को तलाश की कुछ ही मीटर भूमि छोड़कर इस पर पुनः निर्माण प्रारंभ किया किया गया है। आम जनता इसका विरोध कर रही है कि इतने बड़े तालाब की सीमा इतनी कम कैसे हो सकती है।

भूमि सर्वेक्षण विभाग भारत सरकार के तोपोलॉजिकल मैप में तालाब 27 सेक्टर यानी 55 एकड़ है सरकार ने आजादी के बाद से अभी तक कोई नया जला से नहीं बना है, तो फिर आखिर क्यों इतने बड़े जला से की हत्या करने पर तुली हुई। जल को कृत्रिम रूप से उत्पादित नहीं किया जा सकता। वर्तमान सरकार द्वारा प्रदान करने के साथ फिजूलखर्ची पर रोक लगाने की बड़ी-बड़ी घोषणाएं की विभिन्न मदों में कटौती की घोषणा की गई सरकार को बाजार से कर्ज लेना पड़ रहा है।

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