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महिला लेखन के साहित्य की विभिन्न धाराएं आज के कुंभ में इकट्ठा हुई है

Posted on: 04 Mar 2019 12:12 by Rakesh Saini
महिला लेखन के साहित्य की विभिन्न धाराएं आज के कुंभ में इकट्ठा हुई है

प्रसिद्ध लेखिका कृष्णा अग्निहोत्री ने कहा

लेखन को महिलाओं से नहीं बांधना चाहिए लेखन लेखन होता है महिलाओं का भी लेखन किसी भी रूप में पुरुष लेखन से कम नहीं है। सुभद्रा कुमारी चौहान महादेवी वर्मा सरोजनी नायडू यह लिखी गई थी जिन्हें हम अभी तक जानते थे समाज में स्त्री को सिर्फ भोग्यासमझा है।

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अमृता प्रीतम मन्नू भंडारी उषा प्रियंवदा ऐसी लेखिका में हुई है जिनके लेखन को कभी भी भुलाया नहीं जा सकेगा लेखन के लिए यह जरूरी है कि जड़ता को तोड़ा जाए।उसे समाज से लोहा लेना ही पड़ेगा उपवास करना महिलाओं का शौक है लेकिन पति जब पीटता तो वे विरोध नहीं करती।

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उषा किरण खान सुधा अरोड़ा ने लेखन को बहुत आगे बढ़ाया है। महान लेखिका हमारे आज के समाज में मौजूद है इंदौर में भी महिला लेखन बहुत अच्छा लिखा जा रहा है ज्योति जेन मीनाक्षी स्वामी पद्मा राजेंद्र द्वारा बहुत अच्छा लेखन किया जा रहा है।

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