आंसुओं के सागर को रोककर मुस्कानों के पहाड़ खड़े कर गई पुस्तक

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इंदौर लेखिका संघ की मासिक बैठक आज अप्सरा होटल में हुई। इस बैठक में पिछले दिनों विमोचित हुई पुस्तक “अंगदान महादान” पर चर्चा हुई। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं वरिष्ठ साहित्यकार श्री हरेराम जी बाजपेई ने पुस्तक पर बोलते हुए कहा -जैसे ही मैं पुस्तक के पन्ने पलटने लगा भूमिका पर जाकर ही मेरा हाथ रुक गया। थोड़ा सा यहीं रह जाए पढ़कर मैं पूरा ही रुक तक गया। सभी ने अलग-अलग विधाओं में बहुत ही संवेदनशीलता के साथ कहानियों कविताओं लेखों को उकेरा है। मुझे पढ़ कर लगा ही नही कि यह कहानियां काल्पनिक है जैसे हर दृश्य हर वाक्य वास्तविक है। इतनी प्रेरणादाई और अच्छी पुस्तक लिखने के लिए लेखिका संघ की सभी शारदा स्वरूप लेखिकाओं को मेरा सादर नमन। आंसुओं के सागर को रोककर मुस्कानों के पहाड़ खड़े कर गई, पुस्तक जीवन के अवसान से पहले आओ जीवन का सम्मान कर ले, मरने के बाद यही रहने के लिए आओ अंगदान कर ले।

सरस्वती वंदना सुश्री वंदना पुणतांबेकर ने प्रस्तुत की। कार्यक्रम का संचालन सुषमा दुबे ने किया। स्वागत भाषण लेखिका संघ की अध्यक्ष मंजुला भूतड़ा ने दिया।आभार चंद्रा सायता ने माना।

लेखिका संघ की सदस्य शारदा मिश्रा ने पुस्तक के बारे में अपने विचार कुछ यूं रखे –

पुस्तक का प्रत्येक पृष्ठ सारगर्भित और हृदय स्पर्शी है। पुस्तक की सार्थकता अधिक से अधिक लोगों को नेत्रदान एवम् अंगदान के प्रति प्रोत्साहित करना है जिसमें वो पूर्णतया सफल रही है। कभी कोई कविता और कहानी पढ़कर हम आंसू पोंछते है, कभी कहानी के नायक को धन्यवाद देकर गदगद हो उठते है।

लेखिका संघ की सचिव विनीता तिवारी ने पुस्तक के बारे में बताया –

इस पुस्तक को आकार देते समय हमारी भी कुछ भ्रांतियां और मिथक टूटे और इस पुस्तक को बनाने में डॉ अमित जोशी और जीतू बगानी जी का सराहनीय सहयोग रहा। हमने पुस्तक बनाते समय सोचा भी नहीं था कि इतने संवेदनशील मुद्दे पर इतनी अच्छी पुस्तक बन जाएगी।

कार्यक्रम में लेखिका संघ की निम्न सदस्य उपस्थित थीं – ड़ाॅ पुष्पारानी गर्ग, संध्या राय चौधरी ,रश्मि मालवीय, आशा जाकड़, सुषमा व्यास, डा .सुधा चौहान, कुसुम सोगानी, मीना गौड़, रश्मि सक्सेना, मुन्नी गर्ग, सरिता काला, नीति अग्निहोत्री, शोभारानी तिवारी, तृप्ति भूतड़ा, निशा चतुर्वेदी, सुनीता श्रीवास्तव, रानी नारंग, ड़ाॅ चन्द्रा सायता, दविंदर कौर होरा, नियति सप्रे, ममता तिवारी, ड़ाॅ संध्या जैन, डॉ ज्योति सिंह

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