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घूमना-फिरना नहीं, बच्चों के साथ समय बिताना पसंद करती है कल्पना..

Posted on: 12 May 2018 09:34 by shivani Rathore
घूमना-फिरना नहीं, बच्चों के साथ समय बिताना पसंद करती है कल्पना..

इंदौर, शिवानी राठौर : इस साल ‘मदर्स डे’ 13 मई को मनाया जाएगा क्योंकि मई का दूसरा रविवार 13 तारीख को आ रहा है। वैसे तो मां का सम्मान करने और मां को प्यार करने के लिए पर्टिकुलर किसी एक दिन निश्चित करना उचित नहीं है।11

लेकिन अलग-अलग देशों में मदर्स डे की डेट्स अलग-अलग हैं। वहीं कुछ देशों में इंटरनेशनल महिला दिवस यानि 8 मार्च के दिन ही मदर्स डे सेलिब्रेट कर लिया जाता है। इस मौके पर आइयें आज हम बताते है इंदौर की ऐसी महिला के बारें में जो अपने कामों के अलावा बच्चों को ज्यादा से ज्यादा समय देना व प्यार करना पसंद करती है।12

जी हां, हम बात कर रहे है कल्पना भराणी की जो पेशे से डॉक्टर है, इनकी दो बच्चियां है जिनमें एक की उम्र 16 वर्ष और दूसरी 12 वर्ष की है। आपको बता दे कि भराणी अरविंदो कॉलेज में कार्य करती है। वहां मेडिकल टीचर के रूप में वे अपनी सेवाएं देती है और यह उनका शौक भी है। 14

ये है शौक…
भराणी इसके अलावा मैराथन,साइकिलिंग,स्वीमिंग और इन सबके साथ बच्चों को समय देना काफी पसंद करती है। वे बताती है कि मेरे बच्चों को भी मैनें स्वीमिंग,सायकलिंग सिखाई है। साथ ही उन्होंने बताया कि बच्चों को अगर हम इन सब चीजों के लिए मोटिवेट करेंगे तभी तो वे आगे बढ़ेंगे। क्योंकि अगर बच्चे मां को आगे बढ़ते देखते है तभी तो वे सीखेंगे और कुछ करने के लिए हमारी हेल्प करेंगे।15

बच्चों की सोच बदलने का तरीका..
भराणी ने बताया कि अब मेरे बच्चें बड़े हो गए है, उन्हें मै स्वीमिंग, साइकिलिंग सिखाने के बाद मैराथन में भी लेकर जाती हूं। बच्चों की सोच को बदलना चाहिए, नहीं तो हमारे बच्चे सोचेंगे हमारी मम्मा तो बस घर में खाना बनाकर बैठी रहती है। इसकारण उनका कहना है कि बच्चों की सोच बदलना जरुरी है क्योंकि बात पैसे की नही सोच की रहती है। इससे आपकी फिजिकल फिटनस और मेंटल फिटनस बनी रहती है।25

शॉपिंग-किट्टी पार्टी का शौक नहीं 
भराणी ने बताया कि उनका बच्चों से काफी लगाव है और वे दोनों बच्चियों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती रहती है। उन्होने बताया कि समय की आजकल किसी के पास भी कमी नही होती है, लेकिन आजकल लोग अपनी इच्छा से ही अपने बच्चों को समय देना कम पसंद करते है। भराणी का कहना है कि उन्हें दूसरी महिलाओं की तरह किट्टी पार्टी और शॉपिंग, मूवी देखने का ज्यादा शौक नहीं है। ये उस समय उनका अच्छा लगता है जब बच्चें स्कूल या कोचिंग क्लास जाते है।18

बच्चों को छोड़कर कही जाना नहीं पसंद
जब दोनों बच्चियां घर पर होती है तब उनको छोड़कर जाना उन्हें बिल्कुल पसंद नहीं है। वे ज्यादा से ज्यादा समय उनको देना पसंद करती है। मेरी बच्चियां जब घर होती है तो, मैं उनसे पूछती हूं कि आज उन्होंने दिनभर क्या किया या आज मैंने क्या किया। इन सब बातों से बच्चों के दिमाग में यह सोच आती है कि मम्मा की तरह मुझे भी स्वीमिंग करना चाहिए, खेलना चाहिए।24

कुकिंग में हेल्प करते है बच्चें…
भराणी जी बताती है कि उनके दोनों बच्चे कुकिंग में भी उनकी हेल्प करते है। और यह जरुरी भी है क्योंकि खाना सभी की जरुरत है। इसके अलावा बच्चों को दिए गए स्कूली वर्क में भी वे मदद कर उन्हें कुछ नया सिखाने की हमेश कोशिश करती है।23

शाम से रात तक देती है बच्चों को समय…
आपको बता दे कि भराणी जब जॉब से लौटकर आती है उसके बाद से लेकर रात तक बच्चों के साथ समय बिताती है। और बच्चों को ऑफिस जाते समय काम सिखाने के लिए काम बताकर जाती है कि आज आप चोटी बनाकर रखना, रूम अपना क्लीन कर के रखना फिर मम्मा आकर देखेंगी। तो वे खुश होकर काम भी पूरा करते है। उन्हें दोस्तों के साथ गॉसिप करना और घूमना जयादा पसंद नहीं है।

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