इंदौर : शहर की कैबिनेट में एमआईसी में होंगे 10 प्रभारी, 37 प्रकोष्ठ, जल्द होगा विभागों का बंटवारा, संकल्प पूरे करने की रहेगी मुख्य जिम्मेदारी

इंदौर : महापौर परिषद में शामिल किए गए सदस्यों के बीच विभागों के बटवारें को लेकर कयास लगाना शुरू हो गए है। किसको कौनसा विभाग मिलेगा , इसके लिए थोड़ा इंतजार करना पड़ेगा। पूरी संभावना है कि महापौर पुष्यमित्र भार्गव अपनी टीम के सदस्यों को आज कल में विभगों की जिम्मेदारी सौंप देंगे।

विपिन नीमा

इंदौर : महापौर परिषद में शामिल किए गए सदस्यों के बीच विभागों के बटवारें को लेकर कयास लगाना शुरू हो गए है। किसको कौनसा विभाग मिलेगा , इसके लिए थोड़ा इंतजार करना पड़ेगा। पूरी संभावना है कि महापौर पुष्यमित्र भार्गव अपनी टीम के सदस्यों को आज कल में विभगों की जिम्मेदारी सौंप देंगे। महापौर की टीम की चुनाव में जारी इंदौर के विकास का संकल्प पत्र गीता की तरह हाथ मे लेकर एक एक संकल्प को पूरा करने की जिम्मेदारी रहेगी। निगम चुनाव में जारी भाजपा का ये संकल्प पत्र भी अगले साल प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर तैयार किया था।

महापौर के लिए हर विभाग चुनोतिपूर्ण

ये चुनोतिपूर्ण शहर है। यहाँ कदम कदम पर चुनोतियाँ है। ऐसी स्थिति में महापौर को अपनी टीम के साथ हर चुनोतियों को सामना करना पड़ेगा। एमआईसी के अंतर्गत निगम के 10 विभाग शामिल रहेंगे । हर विभाग चुनोतिपूर्ण है। प्रत्येक विभाग के साथ अलग अलग कुल 37 प्रकोष्ठ है। सबसे बड़ा विभाग सामान्य प्रशासन विभाग है जिसमें 11 प्रकोष्ठ शामिल है। शहरवासियों को पूरी उम्मीद है कि महापौर ओर उनकी टीम शहर के विकास को एक नई दिशा देंगे।

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एक एक संकल्प पूरा करते हुए आगे बढ़ना होगा

एमआईसी की सबसे बड़ी चुनोती यही रहेगी कि
पार्टी द्वारा चुनाव में जारी संकल्प-पत्र को गीता की तरह हाथों में लेकर उसके अनुसार एक-एक संकल्प पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ना होगा , क्योकि अगले विधानसभा चुनाव होने वाले है।

आईडीए बोर्ड में संचालक रह चुके है उदावत

पूर्व मंत्री व विधानसभा 5 के विधायक महेंद्र हार्डिया के कोटे से एमआईसी में स्थान पाने वाले राजेश उदावत को उनके अनुभव के हिसाब से विभाग मिलेगा। इससे पहले वे शंकर लालवानी के नेतृत्व वाले शासकीय कार्यालय इंदौर विकास प्राधिकरण के राजनीतिक संचालक मंडल में 3 साल तक संचालक के रूप में कार्य कर चुके है। हालांकि वे भी पहली बार एमआईसी में आए है।

जनप्रतिनिधियों की पसंद का भी पूरा ध्यान रखना होगा

निगम में दिन भर इस बात की चर्चा रही कि किसे-कौन सा विभाग दिया जाए है, यह केवल मेयर को तय नहीं करना। अन्य जनप्रतिनिधियों की पसंद का भी उन्हें पूरा ध्यान रखना होगा ताकि अब सदस्यों में किसी तरह का कोई असंतोष फैले। महापौर इस बात को लेकर भी गंभीर हैं कि नए सेटअप के कारण एमआईसी के विभागों के बंटवारे में कहीं कोई ऊंच नीच न हो जाए।

विभाग और उनके प्रकोष्ठ

● सामान्य प्रशासन विभाग
* 11 प्रकोष्ठ शामिल है वे ये है स्थापना, विधि, जनसम्पर्क, शिक्षा, निर्वाचन, नगर सुरक्षा, , सामाजिक व सांस्कृतिक , आंतरिक सुरक्षा, अभिलेख , भंडारण, मानव संसाधन)

● जलकार्य एवं सीवरेज विभाग
* 2 प्रकोष्ठ – जल प्रदाय और मल वाहन

● लोक निर्माण (जलकार्य) एवं उद्यानिकी विभाग
* 2 प्रकोष्ठ – निर्माण और उद्योग

– राजस्व विभाग
* 3 प्रकोष्ठ – सम्पत्तिकर, दुकान पंजीयन व किराया , बाजार एवं अस्थाई मध्यस्था

● वित्त एवं लेखा विभाग
* 3 प्रकोष्ठ – (बजट, लेखा प्रबंधन , संपरीक्षा

● विद्युत एवं यांत्रिकी विभाग
– 2 प्रकोष्ठ – (विद्युत प्रकोष्ठ एवं यांत्रिकी प्रकोष्ट)

● स्वच्छता एवं ठोस अपशिष्ट प्रबंधन
* 5 प्रकोष्ठ – (ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, सड़कों की सफाई, स्वास्थ्य संरक्षण , खाद्य अपमिश्रण, जन्म तथा मृत्यु व विवाह पंजीयन)

यातायात एवं परिवहन विभाग
* 3 प्रकोष्ठ – लोक परिवहन, टैफिक , पार्किंग

● योजना और सूचना प्रौधोगिकी विभाग
* 4 प्रकोष्ठ – योजना, शहरी भूमि प्रबंधन,अतिक्रमण, सूचना प्रौधोगिकी

● शहरी गरीबी उपशमन विभाग
* 2 प्रकोष्ठ – गरीबी उपशमन और सामाजिक
(10 विभाग के कुल 37 प्रकोष्ठ )

उक्त विभाग में बदलाव या नाम परिवर्तन हो सकते है। ये सभी विभाग पिछली परिषद के है।