Swachh Survekshan 2019 : आइए, इस हैट्रिक पर हम सब अपनी पीठ थपथपाएं

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Swachchhata Survekshan Award 2019 indore

कीर्ति राणा

वो जो पंक्तियां हौसलाअफजाई के लिए कही  जाती है ‘कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती….’ तो इंदौर ने राज्य ही नहीं देश के तमाम शहरों को बता दिया है कि स्वच्छता सर्वेक्षण  में लगातार तीसरी बार इंदौर को नंबर वन का खिताब मिलना विभिन्न प्रशासनिक इकाइयों के साथ शहरवासियों ने जो कदमताल की यह उसी का प्रतिफल है।
फ्लेशबेक में ज्यादा दूर न जाएं पांच-दस साल पहले के इंदौर की ही याद कर लें बक्षीगली सांटा मंडी से लेकर सीतलामाता बाजार या सियागंज से संगम नगर ही क्यों इदौर के किसी गली चौराहे पर चले जाते थे, कचरे के ढेर और उस ढेर में मुंह मारते मवेशी, सूअरों के झुंड नजर आते थे, बदलाव आया तो यह कि ऐसे दृश्य अब ढूंढे नहीं मिलते। कचरे के ढेर नहीं रहे, कचरा पेटी नहीं रही तो उफनता कचरा और  कचरा उड़ाते वाहन ने भी परकाया प्रवेश कर लिया।
अब सुबह से जो ‘इंदौर हुआ है नंबर वन … गीत बजाते हुए कचरा एकत्र करने वाहन निकलते हैं तो इन वाहनों के गली में पहुंचने से पहले ही गीला-सूखा कचरे वाली बाल्टियां गेट के बाहर रखी नजर आती हैं।चार साल पहले यह असंभव लगता था जो न सिर्फ संभव हुआ बल्कि अब घर घर की आदत बन चुका है।कचरामुक्त  सुंदर इंदौर  का आलम यह है कि जिस ट्रेंचिंग ग्राउंड पर हजारों टन कचरा बदबू मारता रहता था उस ग्राउंड का ऐसा कायाकल्प हुआ है कि सरकार चलाने वाले अधिकारी उस मैदान पर लंच करते हैं। घर और कॉलोनी के कचरे से अब खाद बनने लगी है।
मप्र में भाजपा सरकार पंद्रह साल रही, राज्य हो या केंद्र, सरकारें योजनाओं के लिए शहरों को पैसा दे सकती हैं, कुछ करके दिखाने की हिम्मत तो शहरों में ही होना चाहिए। लगातार तीन बार इंदौर कैसे नंबर वन बना यह बाकी राज्यों के लिए केस स्टडी का विषय होना ही चाहिए। राज्य सरकार से ज्यादा यह शहर की सरकार का पुरुषार्थ है, महापौर मालिनी गौड़ ने अपने ही दल के नेताओं से बुराई मोल ली लेकिन निगमायुक्त मनीष सिंह को फ्री हैंड देकर रखा।
उनकी जगह कोई और निगमायुक्त होता तो पहली बार इंदौर नंबर वन नहीं बन पाता और न ही निगमायुक्त आशीष सिंह हैट्रिक तक पहुंचाने का सिलसिला जारी रख पाते। निगम अमले की मेहनत और हजारों सफाई सेवकों का समर्पण भी शिखर नहीं छू पाता, यदि इंदौर के आमजन का निरंतर सहयोग नहीं मिलता।इंदौर की हैटट्रिक तो रही ही है दो अवार्ड और भी मिले हैं इनमें से एक अवार्ड के लिए तो बोहरा समाज बधाई का हकदार है। समाज के धर्मगुरु डाॅ सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन साहब जब इंदौर आए थे उनकी वाअज के महाआयोजन में जीरो वेस्ट थीम के तहत कचरे को स्पाॅट पर ही रिसाइकल किया गया था।इसके साथ ही तीसरा अवार्ड प्रदेश में एकमात्र इंदौर 5 रेटिंग वाला शहर रहा है।
जब पहली बार इंदौर नंबर वन घोषित किया गया था, तब यकायक विश्वास नहीं होने के कारण यह खिताब आपस में मजाक का कारण भी बना था, यही नहीं विरोधियों ने भाजपा के शुभ लाभ की नजर से भी देखा था। दूसरी बार जब नंबर वन की रेस शुरु हुई तब शहर में यह जुनून पैदा हो चुका था कि हमें ही फिर से नंबर वन आना है और तीसरी बार जब साफसुथरा शहर निगमायुक्त आशीष सिंह और उनकी टीम की निरंतर मेहनत से  खूबसूरत भी नजर आने लगा तब इन पेंटिंग-मांडने के सामने से गुजरते  हुए हर राहगीर खुद ही फैसला सुनाने लगते थे कि तीसरी बार भी हम ही बनेंगे नंबर वन।
राष्ट्रपतिजी ने तो आज विधिवत घोषणा की, इंदौर के राहगीर तो महीनों पहले इस परिणाम की भविष्यवाणी कर चुके थे। खुद महापौर दो दिन पहले ही सफाई मित्रों के सम्मान में भोज आयोजित कर उनका आभार मान चुकी थीं। तीसरी बार इंदौर नंबर वन घोषित होने का मतलब है हमें हक मिला है अपनी पीठ थपथपाने का। मालिनी गौड़, निगमायुक्त आशीष सिंह सहित उनकी टीम और हजारों सफाई सेवकों के समर्पण भाव का ही नतीजा है कि हम सफाई को लेकर निरंतर जागरुक बने रहे और यही सारे कारण रहे कि देश में हमारा सिर ऊंचा हुआ है।

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