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ज़माना तो बड़े शौक से सुन ही रहा था, तुम ही सो गए दास्तां कहते-कहते, वरिष्ठ पत्रकार राजेश राठौर की त्वरित टिप्पणी

Posted on: 12 Jun 2018 09:26 by Surbhi Bhawsar
ज़माना तो बड़े शौक से सुन ही रहा था, तुम ही सो गए दास्तां कहते-कहते, वरिष्ठ पत्रकार राजेश राठौर की त्वरित टिप्पणी

इंदौर: यकीन नहीं होता भय्यूजी महाराज नहीं रहे। पिछले कुछ दिनों में भय्यूजी महाराज के साथ कई बार मुलाकात का मौका मिला। दरअसल भय्यूजी महाराज ने इंदौर रीजन कॉन्क्लेव ‘हमसाज’ का आयोजन करवाया था। जिसमें देशभर के साधु-संत सम्मिलित हुए थे। भय्यूजी महाराज ऊर्जा प्रेरणा और सहयोग का जैसे झरना ही था। यकीन ही नहीं होता कि जिनके होने से दिल को तसल्ली मिलती थी, हताश को हिम्मत मिलती थी और दुखियों को अपने दुख से लड़ने के लिए ताकत मिलती थी, ऐसे भ्य्यू जी महाराज आत्महत्या भी कर सकते हैं।

कहा जा रहा है कि जब उन्होंने खुद को गोली मारी उस वक्त घर पर उनकी पत्नी नहीं थी और उनकी बेटी को उन्होंने कल ही पुणे के लिए भिजवाया था जहां वह पढ़ती है। घर पर उनकी मां जोकि कई समय से बीमार चल रही है वह थी और भय्यूजी महाराज थे। देश का शायद ही कोई ऐसा राजनीतिक दल हो, फिल्म, क्रिकेट, एंटरटेनमेंट या किसी अन्य क्षेत्र से जुड़ी कोई बड़ी हस्ती हो जो भय्यूजी महाराज को ना जानती हो और जिसके भय्यूजी  महाराज से बेहतरीन रिश्ते ना हो।12-min

एक ऐसा शख्स जो लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत था आज वह हमेशा हमेशा के लिए चला गया। आज भय्यूजी महाराज उस यात्रा पर चले गए हैं उस अनंत की यात्रा पर जहां से लौटकर कोई नहीं आता। आखिर में बस मैं इतना ही कहना चाहूंगा जमाना तो सुन ही रहा था तुम्हीं सो गए दास्तां कहते कहते।

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