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बैंक की पूर्व संचालक लोकसभा अध्यक्ष सुमित्राताई कड़ी कार्रवाई करें तो बेकसूर डिपोझिटर्स तनावमुक्त हो सकते है,,,,

Posted on: 17 Jun 2018 09:33 by Mohit Devkar
बैंक की पूर्व संचालक लोकसभा अध्यक्ष सुमित्राताई कड़ी कार्रवाई  करें तो बेकसूर डिपोझिटर्स तनावमुक्त हो सकते है,,,,

इंदौर: इंदौर की 80 साल पुरानी,10 हजार सदस्योवाली 15 साल पूर्व दिवालिया हो चुकी महाराष्ट्र ब्रा. बैंक के लगभग 10 करोड़ ₹ के आर.सी.सी( कुर्की) प्रकरण लम्बे अर्से से तहसीलदार न्यायालय में लंबित है। अगर प्रशासन इन प्रकरणों में कुर्की की कार्रवाई कर ले तो हजारो पीड़ित, बेहद दुःखी निर्दोष डिपोझिटर्स को मिल सकती है उनकी जमा राशि।
विश्वसनीय जानकारीनुसार बैंक की ओर से कर्ज वसूली व कुर्की से सम्बंधित तहसीलदार कार्यालय को प्रेषित किये गये 10 करोड़ के रेवेन्यू रिकवरी केस (आर.सी.सी) अभीतक लंबित है।यदि उक्त वसूली हो जाती है तो बरसो से अपनी पसीने की जमा पूंजी मिलने का बेसब्री से इन्तजार कर रहे बेचारे, असहाय जमाकर्ताओ को उनका हक का पैसा मिल सकता है। पिछले दिनों सहकारिता आयुक्त
(भोपाल) ने कलेक्टर निशांत वरवड़े को एक पत्र भेजा था। जिसमे लिखा गया था कि बैंक हित मे
अभीतक कोई कड़ी कार्रवाई क्यों नही की गई ? उसके बाद कलेक्टर ने तहसीलदार को साफ निर्देश दिए थे कि बकाया राशि वसूली सख्ती सेकी जाए।साथ ही वसूली के संबंध में कई गई कार्रवाई से अवगत कराया जावे।
गौरतलब है कि बैंक की ओर से वर्ष 2005 के बाद तहसीलदार की ओर भेजे गये 10 करोड़ की वसूली के 150 प्रकरण अभी अटके पड़े है। लेकिन उन्होंने वसूली नही की। लापरवाह तहसीलदार बदलते गये।और मामले पेंडिंग होते गये। इसी वजह से बैंक के लगभग 1500 निर्दोष डिपोझिटर्स को उनका पैसा नही मिल रहा है।इनमें कई तो स्वर्ग सिधार गये।कई मानसिक रोगी हो गये।कई गम्भीर बीमारी का इलाज- उपचार कर नही पा रहे है। कई मरण।सन्न अवस्था मे है।इनके परिवारजन कल्पनातीत मानसिक यातनाए सह रहे है। जैसे- तैसे जी रहे है।
वर्ष 2005 के बाद मनोरमा कोष्ठी , आर.एस. मंडलोई, विक्रमसिंह गेहलोद ,कौशल बंसल,प्रभात काबरा, बिहारीसिंह, राजकुमार हलदर और चरणसिंह हुड्डा ये तहसीलदार रहे। इन अफसरों ने निहित स्वार्थ और पोलिटिकल प्रेशर की वजह से ही समय रहते सख्त कार्रवाई नही की ये बात साफ हो चुकी है।
उक्त बैंक इसी बैंक की कई सालों तक डायरेक्टर रही सांसद व लोकसभा स्पीकर सुमित्राताई के पुत्र मिलिंद महाजन के इसी बैंक 7 साल(1997 से 2002 और 2002 से 2004) तक डायरेक्टर रहते दिवालिया हुई है। ये वास्तविकता है।
बैंक के संचालक मंडल की हर माह 4 बोर्ड मीटिंग होती थी। उसके हिसाब से हरसाल लगभग 12 x4= 48 नही तो 40 बोर्ड मीटिंग तो हुई ही है। एक साल में 40 मीटिंग के हिसाब से 7 साल में 7x 40 = 228 बोर्ड मीटिंग तो हुई होगी। इनमें से कमसे कम 150 मीटिंग में मिलिंद उपस्थित रहे ही थे।इसके अलावा मिलिंद उपसमितियों के भी सक्रिय सदस्य रहे थे। ऐसे में बैंक डुबाने के संबंध में वे अकेले निर्दोष- पाकसाफ कैसे हो सकते है ??
बहरहाल मेरा बैंक की पूर्व संचालक लोकसभा अध्यक्ष सुमित्राताई से विनम्रतापूर्वक अनुरोध है कि वे उक्त वसूली के मामले में अविलम्ब निष्पक्ष कार्रवाई करें। जिससे उन्हें पीड़ित डिपोझिटर्स की दुवाऐ मिलेंगी।उनका स्वास्थ और बढ़िया हो जावेगा।
# अनिलकुमार धड़वईवाले
अध्यक्ष:- म ब्रा बैंक
(1986-89)

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